●दशकों से बंद पड़े इस एयरपोर्ट के विकास और संचालन को लेकर डॉ. स्वयंभू शलभ ने पीएमओ को भेजा था प्रस्ताव
●रक्सौल एयरपोर्ट के विकास के लिए पीएम पैकेज बिहार 2015 में 250 करोड़ रुपये आबंटित किये गए
●यह एयरपोर्ट एटीआर- 72/ क्यू-400 प्रकार के एयरक्राफ्ट के आईएफआर (IFR) परिचालन के लिए विकसित किया जा सकता है
●एएआई ने राज्य सरकार से 121 एकड़ अतिरिक्त भूमि की मांग की है
●रक्सौल एयरपोर्ट का नाम भारत सरकार की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी स्कीम ‘उड़ान’ के हवाई अड्डों की सूची में शामिल
●यह एयरपोर्ट आरसीएस-उड़ान राउंड 4 में बोली लगाने के लिए भी शामिल है जो प्रक्रियाधीन है
●रक्सौल एयरपोर्ट से उड़ानों के संचालन की बिड प्राप्त होने पर इसका विकास मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन के उड़ान फंड द्वारा होगा
रक्सौल।( vor desk )।रक्सौल में एयरपोर्ट के संचालन को लेकर डॉ. स्वयंभू शलभ द्वारा पीएमओ को भेजे गए प्रस्ताव के आलोक में एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के महाप्रबंधक (योजना) अमित भौमिक एवं उप महाप्रबंधक (योजना) मंजीत सिंह ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसकी जानकारी बीते 12 अक्टूबर को एएआई के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (योजना) संगीता महाय ने डॉ. शलभ को मेल के जरिये दी है। उक्त रिपोर्ट में इस एयरपोर्ट से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं और इसके विकास और संचालन के संबंध में सकारात्मक संकेत मिले हैं।
उक्त रिपोर्ट में बताया गया है कि रक्सौल एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया का एक नॉन ऑपरेशनल हवाई अड्डा है। यह एयरपोर्ट 213 एकड़ भूमि में स्थित है तथा इसकी हवाई पट्टी का आयाम 1372 मीटर × 30.5 मीटर है। रक्सौल एयरपोर्ट के विकास के लिए पीएम पैकेज बिहार 2015 में 250 करोड़ रुपये आबंटित किये गए हैं।
एएआई द्वारा किये गए रक्सौल हवाई अड्डे की फिजिबिलिटी सर्वे के आधार पर यह हवाई अड्डा एटीआर- 72/ क्यू-400 प्रकार के एयरक्राफ्ट के आईएफआर (IFR) परिचालन के लिए विकसित किया जा सकता है यदि राज्य सरकार इसके लिए आवश्यक 121 एकड़ अतिरिक्त भूमि को अधिगृहित कर एएआई को निःशुल्क और सभी भारों से मुक्त सौंप दे। इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र लिख दिया गया है।
रक्सौल हवाई अड्डे का नाम भारत सरकार की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी स्कीम ‘उड़ान’ की हवाई अड्डों की सूची में शामिल है।
उड़ान स्कीम के राउंड 1,2,3 तथा 3.1 की बिड के पश्चात रक्सौल हवाईअड्डे से किसी रुट की बिड प्राप्त नहीं हुई है। यह हवाई अड्डा आरसीएस-उड़ान राउंड 4 में बोली लगाने के लिए भी शामिल है, जो प्रक्रियाधीन है।
भविष्य में एयरलाइनों से रक्सौल हवाई अड्डे से उड़ानों के संचालन की बिड प्राप्त होने पर इसका विकास नागर विमानन मंत्रालय के उड़ान फंड द्वारा किया जाएगा।

