
बिना जलमीनार बने और घरों तक पानी पहुंचे ही संवेदक को पूरा भुगतान करने का आरोप; रॉबिश खरीद से लेकर राष्ट्रीय ध्वज विवाद तक नगर परिषद की योजनाओं पर उठे सवाल, जांच टीमों की निष्क्रियता पर भी घिरे अधिकारी
रक्सौल।(Vor desk)। नगर परिषद की योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब जिला प्रशासन से होते हुए राज्य सरकार के स्तर तक पहुंच गया है। सात निश्चय योजना के तहत वार्ड 19 में करीब 40 लाख रुपये की नलजल योजना में गड़बड़ी के आरोप पर ग्रामीण विकास मंत्री सह जिले के प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार ने जांच के आदेश दिए हैं। शुक्रवार को सिंचाई विभाग के आइबी सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मामला उठने पर उन्होंने उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार को इसकी जांच कराने का निर्देश दिया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि योजना के तहत जलमीनार का निर्माण और घर-घर जलापूर्ति के लिए कनेक्शन उपलब्ध कराने के नाम पर करीब 40 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि कथित तौर पर न जलमीनार बनी और न ही लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने के लिए कनेक्शन दिए गए। इसके बावजूद संवेदक को पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया। सवाल यह है कि जब योजना का बुनियादी ढांचा ही जमीन पर दिखाई नहीं देता, तो भुगतान किस आधार पर और किसकी जांच-पड़ताल के बाद किया गया?
प्रेस वार्ता में शहर की अन्य नलजल योजनाओं की गुणवत्ता, विभिन्न वार्डों में रॉबिश गिराने के नाम पर खरीद और भुगतान तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कस्टम कार्यालय के समीप राष्ट्रीय ध्वज को लेकर हुए विवाद और नगर परिषद से जुड़े अन्य मामलों की जांच कराने की मांग भी रखी गई। मंत्री ने इन शिकायतों पर भी डीडीसी को आवश्यक जांच कराने का निर्देश दिया।
जांच के आदेश बहुत, लेकिन जमीन पर कार्रवाई कहां?
नगर परिषद की शिकायतों को लेकर एक और अहम सवाल जांच टीमों की कार्यशैली पर उठा। पत्रकारों ने पूछा कि जांच के लिए अधिकारियों की टीमें गठित होती हैं, आदेश जारी होते हैं, लेकिन स्थलीय जांच और कार्रवाई का नतीजा सार्वजनिक क्यों नहीं होता? क्या जांच केवल कागजों तक सीमित रह जाती है?
बताया गया कि नगर विकास एवं आवास विभाग ने 1 अक्टूबर 2026 को नगर परिषद से जुड़ी विभिन्न शिकायतों की जांच के लिए विशेष सचिव मनन राम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित की थी। टीम को 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपनी थी। इसके बावजूद जांच की प्रगति और कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं।
इस पर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि यह मामला उनके विभाग का नहीं है, लेकिन जिले का प्रभारी मंत्री होने के नाते वह इसे देखेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि नगर परिषद से जुड़ी शिकायतों की जांच जरूर कराई जाएगी।
प्रेस वार्ता के दौरान पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल भी इन सवालों को सुनकर भौचक नजर आए। मौके पर भाजपा संगठन जिला रक्सौल के जिलाध्यक्ष अशोक पांडेय समेत अन्य लोग मौजूद थे।
अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। खासकर 40 लाख रुपये की नलजल योजना में भुगतान की प्रक्रिया, कार्य की वास्तविक स्थिति, मापी पुस्तिका, उपयोगिता प्रमाणपत्र और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच से ही स्पष्ट होगा कि सरकारी राशि का भुगतान किन आधारों पर हुआ।
