
521 रुपये की जगह 436 रुपये मजदूरी मिलने पर नाराजगी, पुरानी एजेंसी पर नवंबर 2024 से लाखों रुपये बकाया रखने का आरोप; अधिकारियों के सामने हुई तीखी बहस
रक्सौल।(Vor desk)। रक्सौल नगर परिषद की सफाई व्यवस्था से जुड़े आउटसोर्सिंग विवाद ने शनिवार को नया मोड़ ले लिया। दैनिक मजदूरी में कथित कटौती, रजिस्ट्रेशन के नाम पर प्रति सफाईकर्मी 3000 रुपये की वसूली और पिछली एजेंसी के पास लाखों रुपये की बकाया मजदूरी का मामला प्रशासनिक अधिकारियों के सामने उठा। सफाईकर्मियों ने अपनी समस्याओं को लेकर नाराजगी जताते हुए नगर परिषद प्रशासन पर शिकायतों की अनदेखी का आरोप लगाया। थाना परिसर में अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में कई मुद्दों पर तीखी बहस भी हुई। अंततः सफाईकर्मियों ने काम पर लौटने का निर्णय लिया।
521 की जगह 436 रुपये मजदूरी मिलने पर सवाल
सफाईकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीओ नागमणि वर्मा, एसडीपीओ मनीष आनंद और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार के समक्ष कहा कि पहले उन्हें 521 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती थी। आउटसोर्सिंग व्यवस्था लागू होने के बाद अब 436 रुपये प्रतिदिन भुगतान किए जाने की बात कही जा रही है। इससे कर्मियों में असंतोष है। उन्होंने नगर परिषद के अधीन ही काम कराने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में प्रेम मलिक, प्रमिला देवी, राजेश मलिक और भिखारी मलिक शामिल थे। इस दौरान आउटसोर्सिंग एजेंसी गोस्वामी सिक्यूरिटी सर्विसेज के बिहार इंचार्ज दिवाकर गिरी भी मौजूद थे।
एसडीओ नागमणि वर्मा ने कहा कि भुगतान सरकार के निर्धारित मानकों के अनुरूप ही किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पीएफ में कर्मचारी की ओर से 12 प्रतिशत और एजेंसी की ओर से 13 प्रतिशत अंशदान जमा किए जाने की व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त मेडिकल और बीमा जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। एसडीओ ने कहा कि सफाईकर्मी अब असंगठित व्यवस्था से औपचारिक व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं और सरकार उनके हितों को लेकर चिंतित है।उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले भी सफाईकर्मी नगर परिषद के नियमित कर्मचारी नहीं, बल्कि दैनिक वेतनभोगी थे। साथ ही चेतावनी दी कि शहर की सफाई व्यवस्था बाधित नहीं होनी चाहिए।
रजिस्ट्रेशन के नाम पर 3000 रुपये वसूली का आरोप
बैठक में सफाईकर्मियों ने आउटसोर्सिंग एजेंसी पर रजिस्ट्रेशन के नाम पर प्रत्येक कर्मी से 3000 रुपये वसूलने का सामूहिक आरोप लगाया। उनका कहना था कि इससे पहले दो अन्य आउटसोर्सिंग एजेंसियां भी काम कर चुकी हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन के नाम पर इस तरह की राशि मांगे जाने का अनुभव उन्हें नहीं हुआ था।
इस आरोप से बैठक में मौजूद एसडीओ, एसडीपीओ और कार्यपालक पदाधिकारी ने गंभीरता दिखाई। हालांकि, कथित वसूली की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में संबंधित एजेंसी का पक्ष सामने आना बाकी है।
नवंबर 2024 से बकाया मजदूरी का मामला उठा
सफाईकर्मियों का आक्रोश पिछली आउटसोर्सिंग एजेंसी सीबीएस फैसिलिटीज मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, पटना के बकाया भुगतान को लेकर भी सामने आया। कर्मियों ने आरोप लगाया कि नवंबर 2024 से उनकी लाखों रुपये की मजदूरी बकाया है। उनका दावा था कि संबंधित एजेंसी बकाया भुगतान किए बिना चली गई।
सफाईकर्मियों ने कहा कि यूनियन के माध्यम से लिखित शिकायत देने के बावजूद उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया। आंदोलन करने और श्रम विभाग का दरवाजा खटखटाने के बाद ही सुनवाई और कार्रवाई आगे बढ़ी।
इस पर कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार ने कहा कि बकाया भुगतान के मामले में संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि भुगतान नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और बैंक खाता सीज करने की कार्रवाई भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि श्रम अधीक्षक कार्यालय के निर्देश के अनुसार पीएफ की कटौती के बिना भुगतान नहीं किया जाना है।
शिकायत देने पर अधिकारियों के बीच भी अलग-अलग दावे
बैठक में इस बात पर भी विवाद हुआ कि सफाईकर्मियों की ओर से पहले लिखित शिकायत दी गई थी या नहीं। कर्मियों ने कहा कि यूनियन ने पहले ही आवेदन दिया था, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसके विपरीत कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा कि उन्हें ऐसा कोई आवेदन नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि सफाईकर्मियों के पक्ष में श्रम विभाग को रिपोर्ट भेजी गई है, जिसके आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ी है।
इस दौरान बहस तेज होने पर एसडीपीओ मनीष आनंद ने हस्तक्षेप किया। कार्यपालक पदाधिकारी ने सफाईकर्मियों के दैनिक कार्य का समय पर भुगतान कराने और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने का भरोसा दिया।
प्रदर्शन के दौरान स्वच्छता पदाधिकारी से हुई थी कहासुनी
इससे पहले शहर के मुख्य पथ पर कोइरिया टोला स्थित नगर परिषद के जन सुविधा केंद्र भवन के पास प्रदर्शन कर रहे सफाईकर्मियों और स्वच्छता पदाधिकारी कन्हैया कुमार यादव के बीच कहासुनी हुई थी। सफाईकर्मियों ने उनका घेराव कर कई आरोप लगाए। बाद में रक्सौल थानाध्यक्ष रमेश कुमार महतो सहित अन्य लोगों ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया।
प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वार्ता के बाद सफाईकर्मियों ने हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने का निर्णय लिया। हालांकि, मजदूरी में अंतर, कथित रजिस्ट्रेशन वसूली और पुरानी एजेंसी के बकाया भुगतान से जुड़े सवालों का समाधान आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
