
पूर्व शिक्षा मंत्री बीरेंद्र सिंह कुशवाहा बोले—किसी जाति, धर्म या समुदाय से नफरत नहीं, सर्वजन के विकास के पक्षधर
छौड़ादानों। (Vor Desk) अमर शहीद भारत लेनिन जगदेव बाबू का 52वां शहादत दिवस प्रखंड के संत कबीर नगर स्थित नरउल अब्दुल कलाम पुस्तकालय परिसर में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाया गया। गौतम बुद्ध सामाजिक चेतना संस्थान (ट्रस्ट) के तत्वावधान में आयोजित समारोह में सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने जगदेव बाबू को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम का उद्घाटन पटना के पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश दामोदर प्रसाद ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद बहुजन महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई और एक मिनट का मौन रखा गया। अध्यक्षता पूर्व शिक्षा मंत्री बीरेंद्र सिंह कुशवाहा ने की, जबकि मंच संचालन प्रेमचंद्र प्रसाद कुशवाहा ने किया।

अध्यक्षीय संबोधन में बीरेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि सामाजिक न्याय का अर्थ किसी जाति, धर्म या समुदाय से नफरत करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान, अवसर और अधिकार दिलाना है। उन्होंने कहा कि वे किसी के विरोध में नहीं, बल्कि सर्वजन समाज के सर्वांगीण विकास और भेदभावमुक्त व्यवस्था के पक्षधर हैं। संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। ऐसे में जाति, धर्म और समुदाय के आधार पर भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू का संघर्ष शोषित और वंचित समाज को अधिकार दिलाने के साथ ऐसी व्यवस्था कायम करने के लिए था, जहां जन्म, जाति या सामाजिक स्थिति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव न हो। आज उनके विचारों को केवल स्मरण करने के बजाय सामाजिक जीवन और व्यवस्था में उतारने की जरूरत है।
भारत रत्न और पीएमसीएच के नामकरण की मांग

समारोह में जगदेव बाबू को मरणोपरांत भारत रत्न देने, उनकी स्मृति में राजकीय अवकाश घोषित करने तथा पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) का नाम जगदेव बाबू के नाम पर करने की मांग उठाई गई। साथ ही कांशीराम साहब और महात्मा ज्योतिराव फुले को भी मरणोपरांत भारत रत्न देने का प्रस्ताव रखा गया। वक्ताओं ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विकास पुरुष बताते हुए उन्हें भी भारत रत्न देने की मांग की।
महाबोधि मंदिर को लेकर प्रस्ताव
बीरेंद्र सिंह कुशवाहा ने महाबोधि मंदिर, बोधगया को बौद्धों के हवाले सौंपने की मांग भी उठाई। इस मांग के समर्थन में कार्यक्रम में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। इसके साथ ही बोधगया मंदिर प्रबंधन से संबंधित 1949 के अधिनियम को पूरी तरह रद्द करने की मांग भी की गई। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय, समानता और वंचित समाज के अधिकारों के लिए जगदेव बाबू का संघर्ष आज भी प्रासंगिक है।

समारोह में एपीपी प्रभाष चंद्र त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार अशोक वर्मा, मुनेश राम, दीपक अग्निरथ, इंतजारुल हक, केदार अनिल जोशी, जंग बहादुर प्रसाद चौरसिया, मथुरा राम, बिगु मुखिया, महेंद्र प्रसाद यादव, मनोहर साहब, विशेश्वर प्रसाद कुशवाहा, शैलेश मुखिया, पूर्व प्रमुख संजय कुशवाहा, मदन पटेल, डॉ. अक्षय कुशवाहा, भिखारी पासवान, भोला मुखिया, जोखू बैठा, राधेश्याम प्रसाद, शंभू प्रसाद कुशवाहा और अजय कुशवाहा सहित कई लोग मौजूद रहे।
अंत में उपस्थित लोगों ने जगदेव बाबू एवं अन्य महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा सामाजिक न्याय, समानता और भेदभावमुक्त समाज के निर्माण के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
