
रक्सौल।(Vor desk)।
नेपाल-चीन सीमा पर आए भूकंप और तिब्बत की ओर हुए हिमस्खलन के कारण भोटेकोशी एवं त्रिशूली नदी में आई अचानक प्रलयंकारी बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले समेत आसपास के कई क्षेत्रों में भीषण तबाही मचाई है। बाढ़ का पानी नदी के सामान्य जलस्तर से 270 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया था, जिससे तटीय इलाकों की कई बस्तियों में भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, चितवन के देवघाट पहुंचने के बाद त्रिशूली नदी का वेग थम गया है, जिससे तटीय इलाकों में फिलहाल अनहोनी टल गई है। नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 95 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें 27 महिलाएं, 37 पुरुष, 6 बच्चियां, 5 बच्चे और 20 अज्ञात शामिल हैं। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रभावित क्षेत्रों में रातभर निरंतर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
इस जलप्रलय के बाद से बड़े पैमाने पर जनहानि की सूचना है। आंकड़ों के मुताबिक, 133 भारतीय नागरिकों और पर्यटकों सहित कुल 403 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 341 विदेशी और 62 नेपाली नागरिक शामिल हैं। रसुवागढ़ी, टिमुरे, स्याफ्रुबेँसी और मैलुंग जैसे क्षेत्रों में तैनात नेपाल पुलिस के 28 जवान भी संपर्क से बाहर हैं। नेपाली सेना और निजी कंपनियों के हेलीकॉप्टरों द्वारा अब तक 114 आपदा पीड़ितों और घायलों को एयरलिफ्ट कर अस्पतालों तक पहुंचाया गया है। मौसम विशेषज्ञों और उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, रसुवा में स्थानीय स्तर पर बारिश नहीं हुई थी, बल्कि नेपाल-चीन सीमा पर आए 4.4 तीव्रता के भूकंप और हिमस्खलन से नदी मार्ग अवरुद्ध होने के कारण यह अचानक उफान आया था।
राहत की बात यह है कि त्रिशूली का वेग देवघाट में थमने से चितवन और नवलपरासी क्षेत्रों में भारी डुबान का खतरा कम हुआ है, लेकिन चीन बॉर्डर पर स्थिति पूरी तरह सामान्य न होने के कारण खतरा अभी भी बरकरार है। चीन की ओर से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, नदी अवरुद्ध होने वाले स्थान पर जमा पानी पूरी तरह से नहीं निकल पाया है, जिससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के तटीय इलाकों में सतर्कता बनी हुई है। प्रशासन ने नदी के आसपास की बस्तियों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
दूसरी ओर, वाल्मीकि नगर गंडक बराज से गंडक नदी में बुधवार रात्रि दस बजे के आस पास फिलहाल 1 लाख 5 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है,जो सामान्य है। बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में हाई अलर्ट के बावजूद स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और सीमांत इलाकों में रसुवा जैसा गंभीर मंज़र नहीं है। यदि नदी सतह से 270 फीट ऊंचाई वाला जलप्रवाह गंडक में एक साथ उतरता तो बिहार के सीमावर्ती इलाकों में विनाशकारी बाढ़ की स्थिति बन सकती थी, लेकिन प्रवाह नियंत्रित रहने से बड़ा संकट टल गया है। गंडक के जलस्तर में 2 से 2.5 लाख क्यूसेक तक की बढ़ोतरी संभव है,किन्तु,यह सामान्य बाढ़ त्रासदी की तरह होगी। राहत की बात यह है कि बिहार सीमा पार नवलपरासी जिले में नेपाल में नारायणी नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है,जिसे बिहार में गंडक नदी कहा जाता हैं।
