Wednesday, July 8

298 दिव्यांगों को मिले सहायक उपकरण, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़े कदम

बीपीसीएल की सीएसआर योजना के तहत रक्सौल में वितरण समारोह, बच्चों समेत पूर्वी व पश्चिमी चंपारण के लाभार्थियों को मिला सहयोग

रक्सौल।(Vor desk)। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योजना के तहत बुधवार को रक्सौल के एयरपोर्ट रोड स्थित नवजीवन विकास केंद्र में पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण के 298 दिव्यांगजनों एवं दिव्यांग बच्चों के बीच उनकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण वितरित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन संस्था मशाल, पटना द्वारा किया गया। उपकरण मिलने के बाद बच्चों और अन्य लाभार्थियों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। अभिभावकों ने कहा कि इससे उनके बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगी है।

समारोह का शुभारंभ रक्सौल एसडीपीओ मनीष आनंद, एसएसबी के असिस्टेंट कमांडेंट रजत मिश्रा, बीपीसीएल के सीनियर मैनेजर (एचआर) नितीश भारती, रक्सौल पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन कुमार, मेडिकल ऑफिसर डॉ. अमित जायसवाल, बीसीएम सुमित सिन्हा, बीपीआरओ इन्द्रजीत, बुनियाद केंद्र के प्रभारी जिछू नाथ तिवारी, माहेर ममता के वीरेंद्र कुमार, नवजीवन विकास केंद्र की निदेशिका सिस्टर ग्रेस, सिस्टर सुनीता तथा नोट्रे डेम एकेडमी की प्राचार्या सिस्टर हर्षिता ने संयुक्त रूप से उपकरण वितरण कर किया। अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान भी किया गया। समारोह में अनुमंडल प्रशासन, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, चिकित्सक, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में दिव्यांगजन मौजूद रहे।

वक्ताओं ने कहा कि समय पर उपयुक्त सहायक उपकरण उपलब्ध होने से दिव्यांगजन शिक्षा, रोजगार और दैनिक जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बनते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे और व्यक्ति में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। जरूरत उन्हें प्रोत्साहन, अवसर और सतत पुनर्वास उपलब्ध कराने की है, ताकि दिव्यांगता किसी की प्रगति में बाधा न बने। लाभार्थियों से अपील की गई कि वे उपकरणों का सही उपयोग करें, उनकी देखभाल करें और उन्हें मुफ्त में मिली वस्तु समझकर दुरुपयोग न करें, क्योंकि इन्हें समाज के सहयोग और अनेक लोगों के प्रयास से उपलब्ध कराया गया है।

बीपीसीएल की 42.70 लाख रुपये की इस परियोजना के तहत नवजीवन हेल्थ सेंटर, सासाराम को एक आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन भी उपलब्ध कराई गई है। वहीं लाभार्थियों को उनकी व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार एएफओ (AFO), सीपी चेयर, कॉर्नर सीट, स्टैंडिंग फ्रेम, रोलैटर वॉकर, व्हीलचेयर, इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर, पोर्टेबल कमोड, लेग गेटर्स सहित विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए गए।

मशाल की सचिव सिस्टर दीपिका ने बताया कि संस्था वर्तमान में विभिन्न राष्ट्रीय अन्तराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से करीब एक हजार दिव्यांग बच्चों एवं वयस्कों तक अपनी सेवाएं पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि बीपीसीएल का सहयोग केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के जीवन में आत्मविश्वास, सम्मान और नई आशा का संचार करने वाला प्रयास है। उन्होंने विशेष रूप से बीपीसीएल के सीनियर मैनेजर (एचआर) नितीश भारती के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

मशाल संस्था ने जिला प्रशासन, लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, डंकन अस्पताल, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सिस्टर्स ऑफ नोट्रे डेम, नोट्रे डेम एकेडमी रक्सौल तथा नवजीवन विकास केंद्र के सभी कर्मियों के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के अंत में लाभार्थियों के बीच सहायक उपकरण वितरित किए गए। इस अवसर पर मशाल के प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर कुंदन कुमार रौशन,विनोद श्रीवास्तव, संजीव कुमार मिश्रा, संतोष कुमार पटेल, दिवाकर कुमार, राजकुमार मेहता,स्वास्थ्य कर्मी राजेश कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे।

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