
सीमावर्ती रक्सौल बना मेडिकल नॉलेज एक्सचेंज का केंद्र, विधायकों ने कहा- मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ
रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा के प्रमुख शहर रक्सौल में रविवार को चिकित्सा विज्ञान, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता का अनूठा संगम देखने को मिला। शहर के वाई.एस. रिसॉर्ट में एसआरपी मेमोरियल हॉस्पिटल के तत्वावधान में आयोजित कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) में बिहार, पूर्वी चंपारण समेत पड़ोसी देश नेपाल के प्रतिष्ठित चिकित्सकों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन में कैंसर, रोबोटिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, स्त्री रोग, दुर्लभ बीमारियों और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

कार्यक्रम का उद्घाटन रक्सौल विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा, सुगौली विधायक राजेश कुमार उर्फ बब्लू गुप्ता तथा चिकित्सा जगत के वरिष्ठ विशेषज्ञों और गणमान्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। दोनों विधायकों ने एसआरपी मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सुजीत कुमार की पहल की सराहना करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र में इस तरह के भारत-नेपाल स्तरीय वैज्ञानिक सम्मेलन से चिकित्सकों को नवीन तकनीकों और वैश्विक चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी मिलेगी, जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा। इस अवसर पर शिवशक्ति इंडस्ट्रीज के संचालक राजीव गुप्ता एवं उद्योगपति संजय गुप्ता भी मौजूद रहे।

चिकित्सा के नए आयामों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
वैज्ञानिक सत्र में एसआरपी मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सुजीत कुमार ने ‘कार्सिनोमा स्टमक’ पर विस्तृत व्याख्यान दिया, जबकि प्रसिद्ध कैंसर विशेषज्ञ डॉ. शेखर केसरी ने ‘ट्रांसफॉर्मिंग कैंसर केयर इन 2026’ विषय पर आधुनिक कैंसर चिकित्सा की नई संभावनाओं को सामने रखा। वरिष्ठ सर्जन डॉ. आर.के. सिंह ने चिकित्सा जगत में तेजी से लोकप्रिय हो रही ‘रोबोटिक सर्जरी’ की उपयोगिता और भविष्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह सुविधा आईजीआईएमएस सहित कुछ चुनिंदा निजी संस्थानों तक सीमित है, लेकिन आने वाले समय में इसकी मांग तेजी से बढ़ेगी।
डॉ. संजय कुमार ने ‘लेप्रोस्कोपिक मैनेजमेंट ऑफ कोलेडोकल सिस्ट’, जबकि डॉ. नारायण डालमिया ने दुर्लभ बीमारी ‘ट्राइकोबेजोआर’ पर अपने अनुभव साझा किए। न्यूरोसर्जन डॉ. अंकुर आनंद ने उत्तर बिहार में न्यूरोसर्जिकल केयर की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि समय पर उपचार उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनाली गुप्ता ने ‘रिकरेंट रिप्रोडक्टिव फेल्योर’ विषय पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन किया, जबकि डॉ. देवेंद्र कुमार ने ‘हेल्थकेयर में गुणवत्ता : वरदान या अभिशाप’ विषय पर अपने विचार रखे।

आईएमए के पदाधिकारियों का हुआ सम्मान
शाम पांच बजे आयोजित विशेष समारोह में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के संरक्षक डॉ. सहजानंद प्रसाद एवं सचिव डॉ. दिनेश कुमार का सम्मान किया गया। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष शरण ने चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नवीन प्रयोगों और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उपस्थित चिकित्सकों ने रक्सौल जैसे सीमावर्ती शहर में इस स्तर का अंतरराष्ट्रीय सीएमई आयोजित करने के लिए डॉ. सुजीत कुमार को धन्यवाद देते हुए आईएमए को और सशक्त बनाने पर बल दिया, ताकि चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नए शोध और तकनीकी विकास पर नियमित चर्चा जारी रह सके।
इन वरिष्ठ चिकित्सकों ने संभाली वैज्ञानिक सत्रों की कमान
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों का संचालन और चेयरपर्सन की जिम्मेदारी डॉ. आशुतोष शरण, डॉ. प्रिय रंजन, डॉ. प्रमोद कुमार छेत्री, डॉ. सूर्य श्रेष्ठ, डॉ. मनीष मंडल, डॉ. राजीव रंजन कुमार, डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. गौतम भारद्वाज, डॉ. तबरेज अजीज, डॉ. अतुल वर्मा, डॉ. एस. प्रसाद, डॉ. अशोक कुमार सिन्हा, डॉ. नागमणि सिंह, डॉ. प्रभु जोसेफ, डॉ. स्वाति, डॉ. संध्या सिन्हा, डॉ. सिम्पी रानी, डॉ. रंजीत गुहा, डॉ. टी.पी. सिंह, डॉ. निखिल शरण, डॉ. ए.एन. ठाकुर, डॉ. चंदन कुमार तथा डॉ. प्रवीन ने निभाई।
कार्यक्रम में डॉ. एस.के. मिश्रा, पवन कुशवाहा, प्रवीण गुप्ता, मो. अली, देवाशीष कुमार एवं अरविंद सिंह समेत बड़ी संख्या में चिकित्सक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सम्मेलन के दौरान भारत और नेपाल के चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच ज्ञान, अनुभव और तकनीक के आदान-प्रदान को स्वास्थ्य क्षेत्र में सीमा-पार सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया। उपस्थित चिकित्सकों का मानना था कि इस तरह के मंच सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और मरीजों को आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित होंगे।
