
डॉलर-पाउंड बदलेंगे, नेपाली रुपये नहीं; सीमा क्षेत्र में नई व्यवस्था को लेकर उत्साह और सवाल दोनों
रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय महत्व के शहर रक्सौल में पहली बार अधिकृत विदेशी मुद्रा विनिमय (मनी एक्सचेंज) सुविधा शुरू होने जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की पहल पर शहर में दो विदेशी मुद्रा विनिमय काउंटर खोले जा रहे हैं, जहां डॉलर, पाउंड, यूरो समेत विभिन्न विदेशी मुद्राओं का विनिमय किया जा सकेगा।
सीमावर्ती क्षेत्र में लंबे समय से महसूस की जा रही इस जरूरत को लेकर लोगों में उत्साह है, क्योंकि इससे तीसरे देशों के विदेशी नागरिकों, पर्यटकों और विदेश यात्रा पर जाने वाले लोगों को काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, नेपाली करेंसी के विनिमय की सुविधा नहीं मिलने से स्थानीय व्यापारियों और सीमा पार आवागमन करने वाले लोगों में मायूसी भी देखी जा रही है।
दो बैंक में खुलेगा काउंटर
पहला विदेशी मुद्रा विनिमय काउंटर शहर के मेन रोड स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा में तथा दूसरा कोईरिया टोला स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा में शुरू किया जा रहा है। सोमवार 18मई 2026 को एसबीआई मुख्य शाखा स्थित काउंटर का उद्घाटन आरबीआई के रीजनल डायरेक्टर सुजीत कुमार अरविंद करेंगे। कार्यक्रम को लेकर दोनों बैंक शाखाओं में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।एचडीएफसी बैंक के मैनेजर विवेक कुमार ने बताया कि समारोह के बीच इस सुविधा का शुभारंभ होगा।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के रक्सौल मुख्य शाखा के चीफ मैनेजर प्रेम शंकर ठाकुर ने बताया कि उद्घाटन के मौके पर मुख्य महाप्रबंधक अनुराग जोशी मौजूद रहेंगे।मेन ब्रांच के प्रथम तल पर शुरू हो रहे मनी एक्सचेंज काउंटर पर विदेशी मुद्रा के भुगतान और स्वीकार — दोनों सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी मुद्रा का लेन-देन भारतीय रुपये में किया जाएगा।
क्या होगा फायदा
दरअसल, रक्सौल बॉर्डर से नेपाल आने-जाने वाले विदेशी नागरिकों को अब तक विदेशी मुद्रा बदलवाने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। अधिकृत सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को या तो नेपाल के वीरगंज स्थित मनी एक्सचेंज केंद्रों का सहारा लेना पड़ता था या फिर इधर-उधर भटकना पड़ता था। हालांकि अधिकांश विदेशी नागरिक एयरपोर्ट पर ही मुद्रा विनिमय करा लेते हैं, फिर भी सीमा पर यह सुविधा उपलब्ध होने से यात्रियों और पर्यटकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सीमा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि रक्सौल-वीरगंज मैत्री पुल और इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) के रास्ते भविष्य में तीसरे देशों के नागरिकों की आवाजाही बढ़ सकती है। हाल ही में वीरगंज में आयोजित एक बैठक के दौरान नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने भी संकेत दिए थे कि इस मार्ग से विदेशी नागरिकों की नियमित आवाजाही शुरू करने की दिशा में पहल चल रही है।ऐसे में रक्सौल बॉर्डर पर रेलवे, आईसीपी, एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं के बीच फॉरेन मनी एक्सचेंज काउंटर की शुरुआत को रक्सौल के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे शहर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पर्यटन केंद्र के रूप में और मजबूत हो सकेगा,इसमें शक नहीं।
नेपाली करेंसी एक्सचेंज व्यवस्था नहीं होने पर सवाल
हालांकि, इस पूरी व्यवस्था के बीच सबसे बड़ा सवाल नेपाली करेंसी को लेकर खड़ा हो गया है। स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों का कहना है कि रक्सौल की वास्तविक जरूरत भारतीय और नेपाली मुद्रा विनिमय की है, क्योंकि प्रतिदिन बड़ी संख्या में नेपाली ग्राहक, छात्र, मरीज, तीर्थयात्री और व्यापारी इस सीमा से आते-जाते हैं।
फिलहाल नेपाली मुद्रा बदलने के लिए लोग रेल गुमटी और सीमा क्षेत्र के आसपास संचालित अवैध सटही काउंटरों पर निर्भर हैं। हाल के दिनों में रक्सौल पुलिस ने ऐसे कई अवैध केंद्रों पर कार्रवाई कर लाखों रुपये की भारतीय और नेपाली मुद्रा जब्त की थी। व्यापारियों का कहना है कि बट्टे (विनिमय दर) का कोई तय मानक नहीं होने से बाजार और कारोबार प्रभावित होता है।
इस संबंध में एसबीआई के चीफ मैनेजर प्रेम शंकर ठाकुर ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार के वर्तमान नियमों के अनुसार नेपाली और भूटानी मुद्रा को विदेशी मुद्रा की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। इसी वजह से प्रस्तावित मनी एक्सचेंज काउंटरों पर नेपाली करेंसी का लेन-देन संभव नहीं होगा।हालाकि,उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय सरकार स्तर पर लिया जाना है।इसके लिए आरबीआई के अधिकारी ही विशेष तौर पर कुछ बता सकेंगे।
वहीं, सीमा जागरण मंच के स्टेट कोऑर्डिनेटर महेश अग्रवाल ने कहा कि रक्सौल में विदेशी मुद्रा विनिमय काउंटर खुलना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन यहां की वास्तविक जरूरत भारतीय और नेपाली मुद्रा विनिमय की अधिकृत व्यवस्था है। उन्होंने कहा, “यदि नेपाली करेंसी स्वीकार नहीं होगी, तो स्थानीय व्यापारियों, यात्रियों और नेपाल आने-जाने वाले लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। सरकार को इस दिशा में विशेष अनुमति या वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।”
