
महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की
रक्सौल।(Vor desk)। रक्सौल शहर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को वट सावित्री व्रत धार्मिक आस्था, परंपरा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही विवाहित महिलाओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा और सोलह शृंगार के साथ वट वृक्ष (बड़ के पेड़) की पूजा-अर्चना कर पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

शहर के विभिन्न मंदिरों, चौक-चौराहों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थलों पर स्थित वट वृक्षों के आसपास दिनभर महिलाओं की भीड़ लगी रही। एसएसबी 47वीं वाहिनी मुख्यालय में भी उत्सवी माहौल रहा।महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा करते हुए वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा की और कच्चा सूत बांधा। पूजा के दौरान सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण किया गया। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए।

पूजा स्थलों पर महिलाओं ने एक-दूसरे को अखंड सौभाग्य की शुभकामनाएं देते हुए पारंपरिक रीति-रिवाज निभाए। शहर की श्रद्धालु गौरी शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने अटूट प्रेम, तपस्या और समर्पण के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि महिलाएं निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखकर पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं।

सुबह से ही महिलाओं ने पूजा की थालियों में रोली, मौली, दीपक, फल, मिठाई, जल और अन्य पूजन सामग्री सजाकर पूजा-अर्चना की। पर्व को लेकर छोटी बच्चियों और युवतियों में भी खास उत्साह देखने को मिला। मंदिरों और पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही दिनभर बनी रही।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी वट सावित्री व्रत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। गांवों में महिलाएं समूह बनाकर वट वृक्ष के नीचे पहुंचीं और पारंपरिक लोकगीतों तथा पूजा-अर्चना के साथ व्रत संपन्न किया। पूजा के बाद महिलाओं ने बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
