
रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना को मिली रफ्तार: इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी सेवाओं का टेंडर जारी होने से हर्ष, एयरबस-बोइंग लैंडिंग की तैयारी
भारत-नेपाल सीमा पर विकसित होगा रणनीतिक एविएशन हब, सांसद डॉ. संजय जायसवाल बोले— “नदी के ऊपर पुल से गुजरेगा रनवे”
रक्सौल।(Vor desk)। बिहार के सीमावर्ती शहर रक्सौल में वर्षों से बंद पड़े एयरपोर्ट के पुनर्निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने परियोजना के लिए इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी सेवाओं का टेंडर जारी कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को बिहार ही नहीं, बल्कि भारत-नेपाल कनेक्टिविटी के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टेंडर के तहत एयरपोर्ट के रनवे, टैक्सीवे, एप्रन और अन्य एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण एवं विस्तार की विस्तृत योजना तैयार की जाएगी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, रनवे को करीब 2360 मीटर तक विस्तारित करने का प्रस्ताव है, जिससे यहां एयरबस ए-320 और बोइंग 737 जैसे बड़े विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी। साथ ही सामरिक जरूरतों को देखते हुए फाइटर जेट संचालन की संभावना भी जताई जा रही है।जानकारी के अनुसार पुनर्निर्माण पर लगभग 1200 करोड़ रुपये लागत अनुमानित है।
पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने बताया कि 29 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना पर अंतिम स्तर की चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों से उन पर छोटे एयरपोर्ट मॉडल को स्वीकार करने का दबाव था, लेकिन उन्होंने बड़े और भविष्य उन्मुख एयरपोर्ट के पक्ष में अपना रुख कायम रखा।
सांसद के अनुसार, रक्सौल एयरपोर्ट की सबसे अनूठी विशेषता यह होगी कि इसका रनवे नदी के ऊपर बने पुल से होकर गुजरेगा। उन्होंने दावा किया कि संभवतः यह भारत का पहला ऐसा एयरपोर्ट होगा, जहां रनवे का हिस्सा नदी के ऊपर निर्मित पुल पर विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समुद्र के ऊपर रनवे दुनिया में कई जगह बने हैं, लेकिन नदी के ऊपर पुल आधारित रनवे देश में एक अलग उदाहरण होगा।
परियोजना के लिए कुल दो वर्ष की समयसीमा निर्धारित की गई है। इसमें कंसल्टेंट को चार महीने में डिजाइन और तकनीकी कार्य पूरा करना होगा, जबकि निर्माण एजेंसी को अगले 18 महीनों में एयरपोर्ट निर्माण का लक्ष्य दिया जाएगा। अतिरिक्त दो महीने का समय मार्जिन के रूप में रखा गया है।
डॉ. जायसवाल ने इस परियोजना में सहयोग के लिए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और उड्डयन सचिव निलेश चंद्र देवरे का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार” की समन्वित कार्यशैली के कारण ही यह परियोजना जमीन पर उतर रही है।
नेपाल सीमा से सटे रक्सौल की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए इस एयरपोर्ट को राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा व्यापार और क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके निर्माण से उत्तर बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्र को बेहतर हवाई संपर्क मिलेगा। साथ ही व्यापार, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में टेंडर जारी होने की खबर का व्यापक स्वागत किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और व्यापारिक संगठनों को उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित यह परियोजना अब तेजी से धरातल पर उतरेगी और रक्सौल को राष्ट्रीय एविएशन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।बता दे कि इस एयरपोर्ट विस्तार के लिए अतिरिक्त 139 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है, जिसके लिए राज्य सरकार ने ₹207.70 करोड़ से अधिक की राशि जारी की है। यह परियोजना ब्राउन फील्ड के रूप में डेवलप होगी।
