
रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल शहर के कोइरिया टोला में चल रहे सेक्स रैकेट के भंडाफोड़ के बाद कई ऐसी कड़ियां जुड़ रही हैं, जिसने पुलिस और स्थानीय जनता दोनों को हैरान कर दिया है। नगर पालिका सुविधा केंद्र के ठीक पीछे वार्ड23में चल रहे इस काले धंधे में केवल देह व्यापार ही नहीं, बल्कि नशीली और उत्तेजक दवाइयों के संदिग्ध इस्तेमाल का भी सनसनीखेज मामला सामने आया है। संकेत मिल रहे है कि यहां युवतियों और नाबालिगों को संभवतः दवाओं के प्रभाव में रखकर इस दलदल में धकेला जा रहा था।
छापेमारी के दौरान मौके से बरामद भारी मात्रा में जेनेग्रा और एमट्रिसिटाबाइन,टेनोफोविर डिसोप्रॉक्सिल फ्यूमरेट जैसी दवाओं ने पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं।यूज्ड कंडोम जैसी आपत्तिजनक सामग्रियां भी मिली।विशेषज्ञों का मानना है कि इन दवाओं का इस्तेमाल शारीरिक क्षमता बढ़ाने या संक्रमण रोकने के दांव-पेच के तौर पर किया जाता था, जो इस गिरोह की गहरी और सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के नजदीक होने के कारण कोइरिया टोला का यह मकान गिरोह के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना बन चुका था, जहां स्थानीय लोगों की नजरों से बचकर बिहार ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों से भी ग्राहक पहुंच रहे थे।यह मकान मनीष झा का है,जो अब इस दुनिया में नहीं है।
पकड़े गए आरोपियों की कुंडली खंगालने पर पता चला है कि इस रैकेट के तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हैं। गिरफ्तार ग्राहकों में एक राजीव रंजन मुजफ्फरपुर का है तो दूसरा सतीश कुमार सुदूर मध्य प्रदेश के मुरैना का रहने वाला है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस रैकेट का नेटवर्क इतना मजबूत था कि बाहर से आने वाले लोग सीधे इस गुप्त ठिकाने तक पहुंच रहे थे। सूत्रों का यह भी मानना है कि सीमा के करीब होने के कारण इस धंधे के तार नेपाल के सीमावर्ती शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं, जहां से युवतियों की आवाजाही और ग्राहकों के नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था।
प्रशिक्षु आईपीएस हेमंत कुमार के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने रक्सौल बॉर्डर पर सनसनी फैला दी है। पुलिस अब कई बिंदु पर गंभीरता से जांच कर रही है ।रैकेट से जुड़े अन्य महिलाओं ,युवतियों, नाबालिग के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। मोबाइल फोन के डेटा और दवाओं की बरामदगी इस केस को ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ और ‘नार्कोटिक्स’ के एंगल से भी जोड़ रही है। फिलहाल सभी आरोपी जेल की सलाखों के पीछे चले हैं, लेकिन पुलिस की रडार पर अब वो सफेदपोश चेहरे हैं जो पर्दे के पीछे से इस बड़े जाल को संरक्षण दे रहे थे।इस छापेमारी अभियान में से एएसआई शम्भू साह, रवि कुमार और अनीता कुमारी शामिल थे,जिन्होंने काफी तत्परता से ऑपरेशन को सफल बनाया।
क्या कहते है अधिकारी:
प्रशिक्षु आईपीएस सह थानाध्यक्ष हेमंत कुमार सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा:
”हमें कल ही इस अवैध देह व्यापार की सूचना मिली थी, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम गठित की गई। छापेमारी के दौरान कई महिलाएं अनैतिक कार्यों में लिप्त पाई गईं और मौके से आपत्तिजनक सामग्रियों के साथ ऐसी दवाइयां मिली हैं जो एंटी-बैक्टीरियल और एड्स प्रिवेंटिव (HIV बचाव) के तौर पर इस्तेमाल की जाती हैं।
वहां से 06 मोबाइल फोन, 02 पैकेट शक्तिवर्धक दवा, 30 टैबलेट एंटी-वायरल ड्रग्स, 03 कंडोम और सिगरेट बरामद किए गए हैं।मौके से एक नाबालिग लड़की को भी मुक्त कराया गया है। स्थानीय लोगों से पूछताछ में पता चला है कि यह धंधा यहां पिछले कई वर्षों से चल रहा था। कुल पांच महिलाओं और दो ग्राहकों को हिरासत में लेकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। रक्सौल थाना कांड संख्या 186/26 दर्ज कर मामले की सघन जांच और आगे की विधि सम्मत कार्रवाई की जा रही है।”
