Saturday, March 7

रक्सौल: दो दशक का इंतजार खत्म, फाटक 33-34 पर ओवरब्रिज निर्माण की प्रक्रिया शुरू,व्यापारियों में डिजाइन को लेकर संशय

₹157 करोड़ आरओबी के लिए स्वीकृत; मिट्टी जांच और तकनीकी सर्वे का काम प्रारंभ,

रक्सौल ।(Vor desk)।

भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। करीब 22 साल के लंबे इंतजार के बाद रक्सौल के रेलवे फाटक संख्या 33 और 34 पर रेल ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण की जमीनी प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई है। निर्माण एजेंसी ‘क्लासी इंजीनियरिंग कंपनी’ की टीम ने स्थल पर पहुंचकर भू-जल स्तर मापन और मिट्टी की जांच (Soil Testing) समेत तकनीकी सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया है।

₹157 करोड़ की मिली मंजूरी, केंद्र सरकार ने जारी की राशि

​रेलवे सूत्रों के अनुसार, इन दोनों ब्रिज के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने करीब 157 करोड़ रुपये की राशि निर्गत कर दी है। इस परियोजना को धरातल पर उतारने में बेतिया सांसद डॉ. संजय जायसवाल और स्थानीय विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा के प्रयासों को निर्णायक माना जा रहा है। दोनों जनप्रतिनिधियों की लगातार पैरवी के बाद रेलवे ने इस पर ठोस कदम उठाए हैं।

2004 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव ने किया था शिलान्यास

​गौरतलब है कि इस परियोजना का इतिहास काफी पुराना है। पूर्व सांसद स्वर्गीय पंडित रघुनाथ झा के प्रयासों से तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 2004 में ही इसका शिलान्यास किया था। लेकिन राजनीतिक और तकनीकी कारणों से यह प्रोजेक्ट दो दशकों तक फाइलों में ही दबता रहा। अब सर्वे शुरू होने से क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है।

जाम से मिलेगी मुक्ति, व्यापार को मिलेगी गति

​भारत-नेपाल सीमा से सटे होने के कारण यह मार्ग सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। रोजाना यहाँ से 4 से 5 हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ट्रेन परिचालन के समय घंटों फाटक बंद रहने से रक्सौल और वीरगंज के बीच आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। ओवरब्रिज बनने से न केवल शहर को भीषण जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि सीमाई व्यापार में भी तेजी आएगी।

डिजाइन को लेकर व्यापारियों में ‘ऊहापोह’

​एक तरफ जहाँ निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है, वहीं दूसरी ओर मुख्य पथ के व्यापारियों और स्थानीय लोगों में डिजाइन को लेकर भारी शंका है। लोगों को डर है कि वर्तमान डिजाइन से मुख्य बाजार का स्वरूप बिगड़ सकता है और व्यापार प्रभावित होगा। स्थानीय लोगों की मांग है कि इसे फ्लाईओवर (Flyover) के रूप में मैत्री पुल से लेकर कोइरियाटोला नहर चौक के पार तक बनाया जाना चाहिए, ताकि नीचे का बाजार भी सुरक्षित रहे और यातायात भी सुगम हो।

तकनीकी टीम ने जुटाए आंकड़े

​निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों की टीम अब नींव की संभावनाओं और संरचनात्मक डिजाइन के लिए आंकड़े जुटा रही है। सर्वे के दौरान यह देखा जा रहा है कि मिट्टी की भार वहन क्षमता कितनी है। आगामी कुछ हफ्तों में सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर निर्माण कार्य की गति तय की जाएगी

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