Sunday, March 8

शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण का मूल मंत्र, सरकारी स्कूलों के प्रति विश्वास जगाना जरूरी: शैलेंद्र सिंह


​उत्क्रमित मध्य विद्यालय कनना में प्रधानाध्यापक का विदाई सह सम्मान समारोह आयोजित; 32 वर्षों की सेवा के बाद हुए सेवानिवृत्त
​रक्सौल ।(Vor desk)। प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय कनना में शनिवार को एक युग का समापन हुआ, जब बीपीएससी 1994 बैच के अनुभवी शिक्षक और प्रधानाध्यापक शैलेंद्र कुमार सिंह को उनकी सेवानिवृत्ति पर भावभीनी विदाई दी गई। 31 जनवरी 2026 को 60 वर्ष की आयु पूर्ण कर सेवामुक्त हुए श्री सिंह के सम्मान में विद्यालय प्रांगण में विदाई सह सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
​भावुक विदाई और सम्मान समारोह की शुरुआत सहकर्मियों द्वारा श्री सिंह को अंगवस्त्र, दुशाला और स्मृति चिह्न भेंट कर की गई। कार्यक्रम का कुशल संचालन उत्क्रमित मध्य विद्यालय पुरंदरा मौजे के प्रधानाध्यापक राजेश कुमार ने किया। वक्ताओं ने शैलेंद्र कुमार सिंह के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें एक ऐसा शिक्षक बताया जिन्होंने अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को सदैव सर्वोपरि रखा।


​शिक्षक तभी राष्ट्रनिर्माता, जब सरकारी स्कूलों का गौरव लौटे

अपने विदाई भाषण के दौरान प्रधानाध्यापक शैलेंद्र कुमार सिंह काफी भावुक नजर आए। उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंतन साझा करते हुए कहा, “शिक्षक तभी सही मायनों में राष्ट्रनिर्माता कहलाएंगे, जब निजी विद्यालयों की ओर जाने वाली भीड़ सरकारी विद्यालयों की ओर लौटे। इसके लिए हम शिक्षकों को अध्यापन कार्य पूरी ईमानदारी और समर्पण से करना होगा।” उनके इस प्रेरक संदेश ने वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों को सोचने पर मजबूर कर दिया।


​गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति

इस ऐतिहासिक विदाई समारोह में समाज के हर वर्ग की भागीदारी दिखी। उपस्थित प्रमुख लोगों में
​मुखिया जफीर अहमद (कनना पंचायत),शिक्षक बैकुंठ बिहारी सिंह, अरविंद सिंह, जाहिद हुसैन, सुधीर कुमार सिंह, अजय कुमार, सीमा कुमारी,सहित
​ डॉ. हजारी प्रसाद गुप्ता, धीरेन्द्र कुमार, राजकुमार गुप्ता, सुभाष सोनकर, रामलालित पटेल, तहसीलदार सिंह, वेदप्रकाश जी, श्रीलाल प्रसाद, मनोज राव, मनोज कुमार,अविनाश कुमार, अजित कुमार श्रीवास्तव आदि शामिल थे।
​समारोह के अंत में ग्रामीणों और विद्यालय परिवार ने नम आँखों से अपने प्रिय प्रधानाध्यापक को विदा किया। पूरा माहौल ‘गुरुदेव’ के प्रति सम्मान और कृतज्ञता से सराबोर दिखा।

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