
एसएसबी कैंप में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक; बॉर्डर वाइब्रेंट विलेज और भूमि अधिग्रहण के कार्यों में तेजी लाने का निर्णय
रक्सौल।(Vor desk)।भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को लेकर एसएसबी की 47वीं बटालियन कैंप के सभागार में शनिवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सीमा सुरक्षा, अतिक्रमण मुक्ति और भूमि अधिग्रहण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
नो मेंस लैंड से हटेगा अतिक्रमण
बैठक के दौरान एसएसबी कमांडेंट संजय पांडे ने भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा बलों की भूमिका और वर्तमान चुनौतियों का विस्तृत परिचय दिया। कमांडेंट ने जिलाधिकारी को ‘नो मेंस लैंड’ में बढ़ते अतिक्रमण की समस्या से अवगत कराया। साथ ही, शून्य से 5 किलोमीटर और शून्य से 15 किलोमीटर के दायरे में मौजूद अतिक्रमण के संबंध में महत्वपूर्ण डेटा साझा किया। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने ‘अनुमंडल स्तरीय सतर्कता समिति’ के गठन का निर्देश दिया। इस समिति में एसएसबी के पदाधिकारी भी शामिल रहेंगे, जो नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर लगातार अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाएंगे।
वाइब्रेंट विलेज और भूमि अधिग्रहण की समीक्षा
बैठक में एसएसबी कैंप, बीओपी (बॉर्डर आउटपोस्ट) और चेकपोस्ट के निर्माण हेतु विभिन्न भूमि अधिग्रहण के मामलों तथा दाखिल-खारिज की वर्तमान स्थिति की भी गहन समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने ‘बॉर्डर वाइब्रेंट विलेज’ योजना की प्रगति पर बल देते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं से जुड़ी फाइलों पर अविलंब अग्रेतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि सीमावर्ती गांवों का विकास समय सीमा के भीतर हो सके।
बैठक में ये रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में एसएसबी की 20वीं, 47वीं और 71वीं बटालियन के कमांडेंट एवं डिप्टी कमांडेंट शामिल हुए। इनके अलावा जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (मोतिहारी) विकास कुमार, रक्सौल एसडीओ मनीष कुमार, एसडीपीओ मनीष आनंद सहित जिला स्तर के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और एसएसबी के अधिकारी गण मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा सुरक्षा बलों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।
