
एसडीएम मनीष कुमार ने किया रक्सौल के नामचीन स्कूलों का औचक निरीक्षण
गाइडलाइन जारी: 10 फरवरी तक वेबसाइट पर देनी होगी किताबों और यूनिफॉर्म की सूची
रक्सौल ।(Vor desk)। निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर किसी खास दुकान से ही कॉपी-किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बनाए जाने वाले दबाव पर अब जिला प्रशासन ने नकेल कस दी है। जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल के निर्देश पर शनिवार को एसडीएम मनीष कुमार और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) ब्रजेश कुशवाहा ने रक्सौल के विभिन्न निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और स्पष्ट चेतावनी दी कि अभिभावक अब सामग्री की खरीदारी के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।

इन स्कूलों में हुई छापेमारी और बैठक एसडीएम मनीष कुमार ने शहर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों का जायजा लिया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- कैंब्रिज पब्लिक स्कूल * सेंट बेसिल्स स्कूल * एसएवी (SAV) * शिंदे एकेडमी * चंद्रशील विद्यालय निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्कूल के निदेशकों, संचालकों और प्राचार्यों के साथ बैठक की। इस दौरान स्कूल के बोर्ड मेंबर्स को कड़े लहजे में सरकारी गाइडलाइन का पालन करने का निर्देश दिया गया।
नया नियम: क्या है प्रशासन का निर्देश? बैठक में एसडीएम ने साफ कहा कि कोई भी विद्यालय किसी विशेष विक्रेता, प्रतिष्ठान या वेबसाइट से सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य नहीं करेगा। प्रशासन द्वारा जारी मुख्य निर्देश निम्नलिखित हैं:
- सूची का प्रकाशन: आगामी 10 फरवरी से पहले प्रत्येक कक्षा के लिए अनिवार्य पुस्तकों और यूनिफॉर्म की सूची स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।
- सार्वजनिक सूचना: इस सूची को स्कूल परिसर के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा करना अनिवार्य है ताकि अभिभावक अपनी सुविधा अनुसार बाजार से खरीदारी कर सकें।
- यूनिफॉर्म में स्थिरता: स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि यूनिफॉर्म का निर्धारण इस तरह हो कि अगले तीन वर्षों तक उसमें कोई बदलाव न करना पड़े।
- शिकायत प्रकोष्ठ: यदि कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो अभिभावक सीधे अनुमंडल कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

अवहेलना पर होगी कानूनी कार्रवाई एसडीएम मनीष कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्कूल द्वारा अनियमितता पाई जाती है या अभिभावकों को परेशान किया जाता है, तो स्कूल के प्रबंधक, प्राचार्य और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी। बीईओ ब्रजेश कुशवाहा ने भी स्कूल प्रशासन को शिक्षा के अधिकार और पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने की नसीहत दी।
“अभिभावकों पर अब किसी विशेष दुकान का बोझ नहीं होगा। उन्हें पूर्ण स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि वे कहीं से भी शैक्षणिक सामग्री खरीद सकें। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा।” > — मनीष कुमार, एसडीएम, रक्सौल
