
रक्सौल।(Vor desk)। रक्सौल हवाई अड्डे के निर्माण की सुगबुगाहट के बीच भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच ठन गई है। प्रशासन जहां अधिग्रहण की प्रक्रिया और भुगतान की कवायद को तेज करने में जुटा है, वहीं कम मुआवजे और दरों में विसंगति को लेकर स्थानीय भूस्वामियों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को पैमाइश करने पहुंचे जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को ग्रामीणों के भारी विरोध के कारण बैरंग वापस लौटना पड़ा।

मुआवजे की दर में अंतर से आक्रोश
दरअसल, हवाई अड्डा विस्तार के लिए तीसरे चरण में अतिरिक्त रूप से 139 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है।जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल के मुताबिक,अधियाचना प्राप्त होने के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी कर अधिसूचना जारी कर दी गई है।अब भू स्वामियों को भुगतान की प्रक्रिया होनी है।
इस बीच जिला भू-अर्जन पदाधिकारी विकास कुमार जब टीम के साथ जमीन की मापी कराने पहुंचे, तो किसानों ने उन्हें रोक दिया। भूस्वामियों का मुख्य आरोप है कि विभाग अलग-अलग मौजा के लिए अलग-अलग रेट तय कर रहा है, जो तर्कसंगत नहीं है।
किसानों के अनुसार:
हरैया, चंदूली और चिकनी मौजा के लिए अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
भरतमही के किसानों को सबसे कम 4लाख 73रुपये प्रति कट्ठा का रेट दिया जा रहा है।
भूस्वामियों का कहना है कि वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से यह राशि बहुत कम है, जिसे वे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।वर्ष2018में जो रेट लगा था,उससे भी कम दिया जा रहा है।पंचायत में अधिगृहित भूमि के लिए सभी को समान रेट मिलना चाहिए
अधिकारी को लौटना पड़ा वापस
विरोध प्रदर्शन इतना तीव्र था कि पैमाइश की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी। किसानों ने साफ़ शब्दों में कहा कि जब तक विभाग उनकी मांगों पर विचार कर उचित और एक समान मुआवजा तय नहीं करता, वे अपनी जमीन नहीं देंगे। हंगामे को देखते हुए जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को अपनी टीम के साथ वापस जाना पड़ा।

क्या है विभाग का पक्ष?
पूर्वी चंपारण के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि तीसरे चरण के अधिग्रहण के लिए भरतमही, एकडेरवा, चिकनी, सिंहपुर, चंदूली और सिसवा मौजा का चयन किया गया है। रैयतों से अपील किया गया है कि जल्द से जल्द अपना आवेदन दें,ताकि,मापी और भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो सके।विभाग का कहना है कि अधिग्रहण से पहले की सभी कागजी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और अब रैयतों को भुगतान करने की तैयारी चल रही है।मूल्यांकन एवं दर सरकार के नियम के तहत ही निर्धारित किए गए हैं।इसमें कोई विसंगति नहीं है।यदि किसी को रेट को ले कर आपत्ति है,तो वे पुनर्निर्धारण
के लिए सक्षम न्यायालय में अपील कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ‘सड़क, रेल और वायु मार्ग को सुगम बनाने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पंख लगाने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है और रैयतों के भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी।”
हवाई अड्डे की राह में चुनौतियां
रक्सौल हवाई अड्डे का निर्माण स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ा सपना है, लेकिन मुआवजे का विवाद अब इसकी राह में बड़ी बाधा बनता दिख रहा है। दो चरणों का अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन तीसरे चरण में 139 एकड़ जमीन का मामला अब तूल पकड़ चुका है। यदि प्रशासन और किसानों के बीच जल्द ही सहमति नहीं बनी, तो रक्सौल को हवाई मानचित्र पर लाने की योजना में देरी हो सकती है।
