Saturday, March 7

पूर्वी चम्पारण में ‘बचपन’ सुरक्षित: 2025 में 365 बच्चों को मिली नई जिंदगी, बाल विवाह और तस्करी के खिलाफ जिला प्रशासन व ‘प्रयास’ की बड़ी जीत

मोतिहारी (पूर्वी चम्पारण)।(Vor desk)। साल 2025 पूर्वी चम्पारण के लिए बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के दृष्टिकोण से एक मील का पत्थर साबित हुआ है। जिला प्रशासन, पुलिस और नागरिक समाज संगठन ‘प्रयास जुवेनाइल एड सेंटर’ के साझा प्रयासों से जिले में कुल 365 बच्चों को शोषण के दलदल से बाहर निकालकर एक सुरक्षित भविष्य की ओर मोड़ा गया है।

आंकड़ों में सफलता: बाल विवाह और ट्रैफिकिंग पर प्रहार

​प्रयास जुवेनाइल एड सेंटर द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष समुदाय को जागरूक कर और समय पर हस्तक्षेप कर 250 बाल विवाह रुकवाए गए। इसके अतिरिक्त, मानव तस्करी (ट्रैफिकिंग) के खिलाफ चलाए गए अभियानों में 115 बच्चों को मुक्त कराया गया।

  • ट्रैफिकिंग से बचाव: मुक्त कराए गए बच्चों में 62 लड़कियां और 53 लड़के शामिल हैं।
  • नेपाल कनेक्शन: बचाए गए बच्चों में 14 नेपाली लड़कियां और 2 नेपाली लड़के भी शामिल थे, जिन्हें सुरक्षित उनके देश भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।

देशव्यापी नेटवर्क ‘जेआरसी’ का प्रभाव

​’प्रयास’ संस्था देश के सबसे बड़े नेटवर्क ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (JRC) का सहयोगी है, जो देश के 451 जिलों में सक्रिय है। जेआरसी के नेटवर्क ने 1 जनवरी 2025 से अब तक पूरे भारत में 1,98,628 बाल विवाह रोकने और 55,146 बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराने में सफलता पाई है।

पुनर्वास पर जोर: सिर्फ बचाव ही काफी नहीं

​प्रयास की जिला परियोजना समन्वयक आरती कुमारी ने इस सफलता को ऐतिहासिक बताते हुए कहा:

​”सिर्फ बच्चों को मुक्त कराना ही हमारा लक्ष्य नहीं है। गरीबी और शोषण के चक्र को तोड़ने के लिए इन बच्चों का स्कूलों में दाखिला और इनके परिवारों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना अनिवार्य है। यह साल जिला प्रशासन, पुलिस और ग्राम पंचायतों के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण रहा है।”

धार्मिक गुरुओं और सेवा प्रदाताओं की भूमिका

​पूर्वी चम्पारण में बाल विवाह को जड़ से मिटाने के लिए एक अनोखी पहल की गई है। जिले के तमाम धार्मिक स्थलों पर ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के बोर्ड लगाए गए हैं। लगभग 3 लाख धार्मिक गुरुओं को इस मुहिम से जोड़ा गया है ताकि वे समाज को बता सकें कि कोई भी धर्म बाल विवाह की अनुमति नहीं देता।

​इसके साथ ही, केंद्र सरकार के 100 दिवसीय जागरूकता अभियान के तहत अब विवाह से जुड़े अन्य सेवा प्रदाताओं—जैसे टेंट हाउस, बैंड-बाजा और कैटरर्स—को भी कानूनी चेतावनी दी गई है कि बाल विवाह में उनकी भागीदारी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लक्ष्य 2030: बाल विवाह मुक्त भारत

​प्रयास जुवेनाइल एड सेंटर का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत से बाल विवाह, बाल मजदूरी और बाल वेश्यावृत्ति को पूरी तरह समाप्त करना है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर यह नेटवर्क सीमावर्ती इलाकों में लगातार निगरानी रख रहा है ताकि किसी भी मासूम का बचपन नीलाम न हो सके।

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