Saturday, March 7

बिहार में ‘नो’ तो नेपाल में ‘जश्न’: नए साल पर सरहद पार ‘पर्यटन का महाकुंभ’, कैसिनो और लजीज व्यंजनों की धूम


​रक्सौल (vor desk): साल 2025 को विदाई देने और 2026 के स्वागत के लिए बिहार और नेपाल की सीमा पर खुशियों का ‘ट्रैफिक जाम’ लगा है।देर रात तक भारतीय वाहनों का काफिला नेपाल के वीरगंज बॉर्डर की ओर बढ़ता रहा। बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी और कड़े नियमों के बीच, पड़ोसी देश नेपाल का पर्यटन बाजार भारतीय सैलानियों के लिए ‘सेलिब्रेशन हब’ बन चुका है। वीरगंज से लेकर सिमरा तक और काठमांडू से लेकर पोखरा तक, हर कोना भारतीय मेहमानों के स्वागत में डूबा हुआ है।

​बदल गया ट्रेंड: अब ‘मिनी लास वेगास’ बना वीरगंज-सिमरा

​एक समय था जब कैसिनो और हाई-प्रोफाइल नाइटलाइफ के लिए पर्यटकों को काठमांडू जाना पड़ता था। लेकिन पिछले तीन वर्षों में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अब बारा और पर्सा जिलों के करीब आधे दर्जन से अधिक लग्जरी होटलों में कैसिनो की चमक बिखर रही है। बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर और चंपारण के करीब होने के कारण ये जिले अब ‘शॉर्ट वेकेशन’ के लिए पहली पसंद बन गए हैं।बिहार के बाहर के भी भारतीय नागरिक नेपाल पहुंच रहे हैं ।

​अर्थव्यवस्था को ‘बूस्टर डोज’: 10 करोड़ के जाम टकराने की उम्मीद

​नेपाल के होटल व्यवसायी इस नववर्ष को एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में देख रहे हैं।
​राजस्व का उछाल: अनुमान है कि इस बार शराब और बीयर की बिक्री से नेपाल के खजाने में 7 से 10 करोड़ रुपये का इजाफा होगा।
​वाहनों का रेला: सीमा शुल्क कार्यालय के आँकड़े गवाह हैं कि अब तक 4,000 से अधिक भारतीय लग्जरी गाड़ियाँ नेपाल की सरहद में दाखिल हो चुकी हैं।

​पर्यटन के साथ ‘कल्चरल तड़का’


वीरगंज के विभिन्न ​होटलो के संचालको के मुताबिक, अब सैलानी सिर्फ शराब के लिए नहीं, बल्कि बेहतर अनुभव के लिए आ रहे हैं। इसी मांग को देखते हुए होटलों ने:
​लाइव बैंड और फोक डांस: नेपाली और भारतीय संगीत का फ्यूजन तैयार किया है।
​स्पेशल पैकेज: सपरिवार आने वाले लोगों के लिए स्टे और साइटसीइंग के खास डिस्काउंट दिए जा रहे हैं।
​कनेक्टिविटी: सड़क मार्ग से 5-6 घंटे का सफर हो या सिमरा से 20 मिनट की काठमांडू फ्लाइट, पर्यटकों के लिए हर विकल्प खुला है।


​क्यों खास है इस बार का जश्न?
​बिहार के सीमावर्ती जिलों—पूर्वी चंपारण सहित सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फर पुर,सीवान, छपरा ,गोपालगंज और वैशाली—से पर्यटकों का इतना बड़ा पलायन पहले कभी नहीं देखा गया। स्थानीय जानकारों का मानना है कि नेपाल की ‘लिबरल’ (उदार) पर्यटन नीति और सुरक्षित माहौल भारतीय मध्यम वर्ग को अपनी ओर खींचने में सफल रहा है।(रिपोर्ट:पीके गुप्ता/राजेश केशरीवाल)

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