
मोतिहारी।(Vor desk)। चंपारण की साहित्यिक धरा पर रविवार को विद्वानों और साहित्यकारों का अनूठा संगम देखने को मिला। स्थानीय आर्य विद्यापीठ के सभागार में ‘ख्वाब फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित भव्य सम्मान समारोह में रक्सौल के सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. (डॉ.) स्वयंभू शलभ को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए ‘सत्याग्रह सम्मान–2025’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान उनकी छठी पुस्तक ‘संस्कृति के सोपान’ के लिए प्रदान किया गया है।
लघु फिल्म के जरिए दिखा रचना संसार
कार्यक्रम का आकर्षण डॉ. शलभ के जीवन और उनके रचना संसार पर आधारित एक लघु फिल्म रही, जिसे देख दर्शक भावविभोर हो गए। समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि एस.एन.एस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार, विशिष्ट अतिथि आर्य विद्यापीठ के एमडी डॉ. रंजीत कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
‘कलामवाद’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण
इस गौरवमयी अवसर पर फाउंडेशन के संस्थापक मुन्ना कुमार द्वारा रचित पुस्तक ‘कलामवाद’ का भी विमोचन किया गया। यह पुस्तक पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन दर्शन और उनके सिद्धांतों पर आधारित है।
लेखक का सामाजिक सरोकार जरूरी: डॉ. शलभ

सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में डॉ. स्वयंभू शलभ ने कहा कि लेखन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य व्यापक होना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “आज के दौर में सामाजिक बदलाव के लिए कलम को अपनी ताकत और सामाजिक सरोकार को अपना मकसद बनाना अनिवार्य है।”
विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां हुईं सम्मानित
समारोह में चंपारण सहित बिहार के विभिन्न जिलों से आए लेखकों, शिक्षकों और पत्रकारों का समागम हुआ। इस दौरान विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभूतियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में फाउंडेशन के सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन करने के पश्चात फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्पणा सिन्हा ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
