Saturday, March 7

जेन-जी’ युवाओं ने सरिसवा नदी को बचाने के लिए खोला मोर्चा,नदी का जहरीला पानी बोतल भर कर जिला प्रशासन और महानगरपालिका को उपहार के रूप में सौंपा,एक सप्ताह का दिया अल्टीमेटम!

वीरगंज।(Vor desk)।लगभग तीन दशकों से प्रदूषण और अतिक्रमण की मार झेल रही वीरगंज की सिर्सिया(सरिसवा ) नदी को बचाने के लिए स्थानीय युवाओं ने एक अनोखा और दबावपूर्ण अभियान शुरू किया है। शनिवार सुबह वीरगंज के करीब 30 ‘जेन-जी’ युवाओं ने रानीघाट स्थित नदी से 20 बोतलों में काला और जहरीला पानी भरा और उन्हें उपहार स्वरूप जिला प्रशासन कार्यालय (सीडीओ) और वीरगंज महानगरपालिका के कार्यालय में जाकर अधिकारियों को सौंप दिया। युवाओं का कहना है कि पर्सा-बारा औद्योगिक कॉरिडोर के उद्योग बिना किसी शोधन के रसायनयुक्त पानी और कचरा सीधे नदी में बहा रहे हैं, जिससे यह जीवनदायिनी नदी अब नाले में तब्दील हो चुकी है।
​इस अभियान का नेतृत्व कर रहे किसु सर्राफ के मुताबिक, महानगरपालिका और अन्य निकायों के पिछले प्रयास विफल होने के कारण अब युवाओं ने खुद कमान संभाली है। उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो नदी के साफ होने का भ्रम फैला रहे थे। सर्राफ ने चेतावनी दी है कि अगले शनिवार को वे नदी का प्रदूषित पानी लेकर वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ जाएंगे क्योंकि संघ हमेशा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों का पक्ष लेता रहा है। इसके बाद युवा इस गंदे पानी की बोतलें बारा और पर्सा के पूर्व मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के घरों और कार्यालयों तक भी पहुंचाएंगे। युवाओं की योजना नदी के प्रदूषित पानी में खड़े होकर कविता पाठ और महाआरती जैसे कार्यक्रम आयोजित करने की भी है।
​अभियान से जुड़े एक अन्य युवा आयुष गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अक्सर सिर्सिया नदी के प्रदूषण की चर्चा सिर्फ छठ पर्व के समय होती है, लेकिन वे इस धारणा को बदलना चाहते हैं। उन्होंने महानगर के निवासियों से इस मुहिम में जुड़ने की अपील की है ताकि वीरगंज की इस ‘लाइफलाइन’ को बचाया जा सके। गौरतलब है कि बारा के रामवन से निकलकर भारत के रक्सौल तक बहने वाली इस नदी को कपड़ा, चमड़ा, साबुन और कार्टन जैसे उद्योगों ने पूरी तरह जहरीला बना दिया है। हालांकि महानगरपालिका ने कुछ उद्योगों पर जुर्माना भी लगाया और विरोध स्वरूप उद्योगों के भीतर कचरा भी फेंका, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। वर्ष 2010 की एक सरकारी रिपोर्ट में भी 46 उद्योगों को इस प्रदूषण का मुख्य जिम्मेदार ठहराया गया था, फिर भी प्रभावी कार्रवाई की कमी के कारण आज हजारों ग्रामीण और मवेशी गंभीर बीमारियों का खतरा झेल रहे हैं।

इस सफाई अभियान और विरोध प्रदर्शन में राजन श्रीवास्तव, विक्की सर्राफ, राज शाह, आयुष गुप्ता, ओशन गुप्ता, पवन यादव, विक्की गुप्ता, ऋषु वर्मा, शिवराज पटेल, अजय महतो, सुरेश बिरादी, आकाश दास, एलेक्स शाह और सुजीत सहित कई युवाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। इन युवा कार्यकर्ताओं ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि नदी प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तत्काल ठोस योजना बनाई जाए, औद्योगिक कचरे की निगरानी की जाए और इस समस्या का दीर्घकालीन समाधान निकाला जाए।

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