
वीरगंज,नेपाल।(Vor desk)। भारत के महावाणिज्य दूतावास की पहल पर, वीरगंज में गीता महोत्सव का आयोजन अत्यंत भव्य और उत्साहपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। महावाणिज्य दूतावास परिसर में आयोजित इस समारोह का मुख्य उद्देश्य सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाना, आध्यात्मिकता को बढ़ावा देना और भारत तथा नेपाल के बीच मैत्री संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करना था।
इस अवसर पर, महावाणिज्य दूत देवी सहाय मीना ने इस बात पर प्रकाश डाला कि गीता महोत्सव यह स्पष्ट करता है कि भगवद् गीता मात्र एक धार्मिक पुस्तक न होकर, मानव जीवन को सही राह दिखाने वाला एक सार्वभौमिक मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि महाभारत के युद्धक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए संवाद के रूप में प्रस्तुत यह ग्रंथ आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक, जीवंत और प्रेरणादायक है। महावाणिज्य दूत ने गीता को एक ऐसा जीवंत पाठशाला बताया, जो शाश्वत सत्य, कर्तव्यपरायणता, नैतिकता और मानव धर्म के गहन सिद्धांतों की शिक्षा देता है और यह समय, भूगोल या संस्कृति की सीमाओं को नहीं मानता।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत और नेपाल के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंध अत्यंत गहरे हैं, और भगवद् गीता दोनों ही देशों के नागरिकों के लिए साझा आस्था और प्रेरणा का एक अटूट स्रोत बनी हुई है।
उन्हीं की अध्यक्षता में हुए इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में दूतावास के वाणिज्य दूत मनीष दास, दूतावास के अन्य अधिकारीगण, तथा विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समारोह में कई विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, साथ ही गीता के संदेशों और शिक्षाओं पर आधारित प्रेरक प्रवचन भी आयोजित किए गए।
