
स्थानीय लोगों में नाराज़गी, प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपील।
रक्सौल।(Vor desk)। अंबेडकर चौक पर स्थित संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित माल्यार्पण कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस उपेक्षा को खुलकर रेखांकित किया और इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता करार दिया।
स्थानीय नागरिकों एवं अंबेडकर ज्ञान मंच के सदस्यों ने कहा कि प्रतिमा के आसपास साफ–सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तथा सौंदर्यीकरण का अभाव स्पष्ट दिखता है। यह स्थिति उस महान विचारक और राष्ट्रनिर्माता के प्रति अनादर जैसी प्रतीत होती है, जिन्होंने देश के लोकतांत्रिक ढांचे की नींव रखी।

कार्यक्रम में यह मांग तेज़ी से उभरकर सामने आई कि अंबेडकर चौक को शीघ्र गोलम्बर (राउंडअबाउट) के रूप में विकसित किया जाए, ताकि यह स्थल न केवल सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आकर्षक बने, बल्कि शहर का गौरव भी बढ़े। वक्ताओं ने कहा कि गोलम्बर निर्माण से चौक का यातायात भी सुचारू होगा और यह स्थल सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है।अंबेडकर ज्ञान मंच के सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि-जब शहर के अन्य चौकों का विकास हो सकता है, तो अंबेडकर चौक की उपेक्षा क्यों? बाबासाहेब की प्रतिमा का सम्मान होना चाहिए, इसे प्राथमिकता पर संरक्षित और विकसित किया जाए।
स्थानीय लोगों ने नगर परिषद और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलनात्मक कदमों पर विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि इसी चौक पर आगामी 6 दिसंबर को नए अंबेडकर प्रतिमा स्थल के शिलान्यास तथा 14 अप्रैल को नई प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम प्रस्तावित है। ऐसे में गोलम्बर निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य समय रहते शुरू होना अत्यंत आवश्यक बताया गया।
शहरवासियों के अनुसार-अंबेडकर चौक का गोलम्बर केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और संविधानिक मूल्यों का प्रतीक होगा। स्थानीय नागरिकों में इस मुद्दे को लेकर गहरी नाराज़गी है और अब यह मांग हॉट टॉपिक बन चुकी है।
