
रक्सौल ।(Vor desk)। रक्सौल के भाजपा प्रत्याशी प्रमोद कुमार सिन्हा करीब 19हजार मतों से चुनाव जीत गए हैं।बिहार के रक्सौल से भाजपा के विधायक है,जिन्होंने पहली बार 2020में जीत दर्ज कराई थी। पार्टी ने इस बार के चुनाव में उन पर एक बार फिर से विश्वास करते हुए उन्हें यहां से अपना उम्मीदवार बनाया था,जिसके बाद उन्होंने यहां शानदार जीत दर्ज कराई हैं।अब उनको मंत्री बनाने की मांग उठने लगी है।इस बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी श्याम बिहारी प्रसाद को पराजित किया है,जो कद्दावर पूर्व मंत्री है।यहां से 1990के पहले कांग्रेस के सगीर अहमद मंत्री रहे थे,जिसके बाद आज तक रक्सौल को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी।
सातवीं बार बीजेपी का कब्जा
रक्सौल भाजपा का गढ़ माना जाता है। इस सीट पर 2000 यानी भाजपा ढाई दशक से लगातार शासन में है। इतना ही नहीं, बिहार विधानसभा के पिछले चुनाव में प्रमोद कुमार सिन्हा जो हाल ही में पार्टी में शामिल हुए थे और पहली बार रक्सौल से विधान सभा का चुनाव भी लड़ा, तब भी उन्होंने भाजपा के नाम पर भारी बहुमत से जीत हासिल की थी।
प्रमोद कुमार सिन्हा की जीवनी
स्वर्गीय शिवबचन प्रसाद सिन्हा के पुत्र प्रमोद कुमार सिन्हा की उम्र 65 साल है।उनका जन्म तारीख 2 अप्रैल 1960 को रक्सौल में ही हुआ था।श्री सिन्हा जाति से कोईरी (कुशवाहा) है।
प्रमोद कुमार सिन्हा के राजनीतिक करियर की शुरुआत लगभग 80के दशक से शुरू हुई थी।वे वार्ड कमिश्नर चुनाव जीतने के बाद पूर्व विधायक स्व राज नंदन राय के साथ जनता दल में रहे।उन्होंने अपनी सक्रिय राजनैतिक यात्रा की शुरुआत समता पार्टी से की और बाद में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जनता दल (यूनाइटेड) के फाउंडर मेंबर और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के तौर पर की थी।इस पार्टी को जेडीयू के नाम से भी जाना जाता है।वे घोड़ासहन विधान सभा क्षेत्र से दो बार चुनाव लड़े,लेकिन,पराजित रहे ।श्री कुमार जनता दल यूनाइटेड में जिला स्तरीय अध्यक्ष के रूप में जब कार्यरत थे, तभी वे भाजपा के संपर्क में आये और फिर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ज्यॉइन कर ली।क्षेत्रीय सांसद डा संजय जायसवाल के सानिध्य से भाजपा ने उन्हें पार्टी सदस्यता ग्रहण करते ही टिकट दे दिया और इसके लिए पार्टी ने मौजूदा विधायक सदस्य अजय सिंह को दरकिनार कर दिया जबकि डॉ अजय सिंह भाजपा के टिकट पर वहां से पांच बार के विधायक रहे है।वे 2000 से 2020 तक कुल पांच बार भाजपा के विधायक के तौर पर चुने गए थे फिर भी पार्टी ने उन्हें 2020 में टिकट नहीं दिया और उनके बदले प्रमोद कुमार सिन्हा को टिकट दे दिया। इसको लेकर उस समय अजय सिंह सहित उनके समर्थक काफी नाराज थे। वे सब मिलकर भाजपा नेतृत्व से सिन्हा की उम्मीदवारी को ख़ारिज करने की मांग भी की पर भाजपा ने उनकी एक न सुनी। परिणाम यह हुआ कि उन्होंने बसपा के टिकट पर वहां से चुनाव लड़ा पर हार गए।
जबकि पार्टी में हाल ही में आये और पहली बार चुनाव लड़ने वाले प्रमोद कुमार सिन्हा की चुनाव में जीत हुई।चुनाव में प्रमोद कुमार को 80,979 मत पड़े जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के रामबाबू यादव को 44,056 मत पड़े। प्रमोद कुमार ने कांग्रेस प्रत्याशी रामबाबू यादव को 36,923 के भारी बहुमत से पराजित किया. इतने बड़े मतों के अंतर से जीत के बाद उन्होंने अपनी राजनैतिक हस्ती को मजबूत कर लिया।
इस बार उनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस के श्याम बिहारी प्रसाद और जन सूरज से कपिलदेव प्रसाद उर्फ़ भुवन पटेल से था,जो कांटे की टक्कर देने जैसे माहौल दिखने के बाद परिणाम आने पर बुरी तरह पराजित घोषित हुए।
