
रक्सौल।(Vor desk)।भारत-नेपाल सीमा से सटा रक्सौल विधानसभा क्षेत्र इस बार एक बड़े राजनीतिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। पिछले कई दशकों से राष्ट्रीय पार्टियों के दबदबे वाले इस क्षेत्र में, जन सुराज की एंट्री ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है, जिसके चलते पारंपरिक चुनावी गणित ध्वस्त होता दिख रहा है। यह चुनावी त्रिकोण इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राजनीतिक हवा ने अपना रुख बदला है और परिणाम उलट-पलट होने के संकेत मिल रहे हैं।
आदापुर के बाद जन सुराज ने रक्सौल शहर के मुख्य पथ पर भी अपना चुनावी कार्यालय खोल दिया है। यह कार्यालय सड़क के पूर्व में स्थित एनडीए और इंडिया गठबंधन के कार्यालयों के ठीक पास है, जिससे ‘तंदूरी गली’ का पूरा इलाका चुनावी शोर से गूंज रहा है। यह शोर साफ संदेश दे रहा है कि इस बार चुनाव दो ध्रुवों के बीच सिमटा हुआ नहीं है।
जन सुराज के प्रत्याशी भुवन पटेल, जो एक स्वच्छ छवि ,शिक्षित और पुराने राजनीतिक अनुभव के धुरंधर हैं, दोनों गठबंधनों पर एक साथ हमलावर हैं।जनता दल यू के प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दे कर जन सुराज में शामिल हुए श्री पटेल जन संपर्क अभियान और सभाओं में जोर देकर कहते हैं कि इन दोनों दलों ने रक्सौल को निराश किया है और सीमावर्ती क्षेत्र के विकास को दशकों तक नजरअंदाज किया गया है।

भुवन पटेल स्पष्ट अपील करते हैं कि ‘आजमाए को क्या आजमाना’ जब दोनों घटक के नेता और उनकी नीतियां चूक चुकी हैं।
इस बदलाव की अपील में युवा और मुस्लिम समुदाय का बढ़ता रुझान जन सुराज को मजबूती दे रहा है। क्षेत्र में अब विकास की चर्चा तेज हुई है और स्थानीय स्तर पर बुनियादी विकास एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन चुका है। प्रशांत किशोर (पीके) के नेतृत्व में जन सुराज एक नई व्यवस्था लाने का दावा कर रहा है और भुवन पटेल इसी बदलाव के नाम पर मतदाताओं से एक मौका मांग रहे हैं। पहले रक्सौल में जन सुराज सीधे तौर पर एनडीए को डैमेज करती दिख रही थी,अब बढ़त से दोनों गठबंधन को नुकसान होता दिख रहा है।यदि वोटो की बढ़त बरकरार रही तो
यहां त्रिकोणीय मुकाबला नई करवट ले सकता है। यहां का चुनावी रण स्पष्ट संकेत दे रहा है कि रक्सौल विधानसभा का परिणाम इस बार अप्रत्याशित हो सकता है।
