Saturday, March 7

बिहार-नेपाल सीमा पर छठ पर्व की भव्य तैयारी: रक्सौल-बीरगंज में सांस्कृतिक एकता का अद्भुत नज़ारा होगा प्रस्तुत

रक्सौल।(Vor desk)। बिहार और नेपाल की सीमा पर स्थित रक्सौल और वीरगंज में छठ पर्व को लेकर भव्य तैयारी चल रही है।सीमा पर दोनों ओर के नागरिक मिल जुल कर पर्व मनाते हैं और साझा संस्कृति का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। यह पर्व  27 और 28 अक्टूबर को मनाया जाएगा।इस अवसर पर एक बार फिर भारत और नेपाल के बीच सदियों पुरानी सांस्कृतिक, धार्मिक एकरूपता और साझा परम्पराओं का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

सरिसवा नदी के तट पर, रक्सौल और बीरगंज की सीमा को जोड़ने वाले मैत्री पुल के नीचे स्थित कस्टम छठ घाट इसकी तैयारी का केंद्र बिंदु बना हुआ है। इस घाट पर भारत और नेपाल दोनों देशों के हजारों व्रती मिलकर सूर्य देव की आराधना करेंगे। नदी के दोनों छोर पर पूजा का भव्य आयोजन किया जाएगा, जहाँ दोनों देशों के लोग एक साथ व्रत रखकर अर्घ्य देंगे।

रक्सौल कस्टम चेकपोस्ट घाट पर भारतीय नागरिक जुटेंगे, तो वहीं नो मेंस लैंड एरिया से सटे पर्सा जिला बीरगंज के नगवा वार्ड 19 के नेपाली कस्टम क्षेत्र के सैकड़ों लोग भी इसमें शामिल होंगे। व्रतियों को शुभकामनाएं देने और मिलने-जुलने के लिए बीच में एक अस्थायी चचरी पुल भी बनाया गया है, जो सद्भावना पुल के रूप में दोनों देशों के लोगों के बीच के स्नेह और सहयोग को दर्शाएगा। यह दृश्य निश्चित रूप से अत्यंत विहंगम और मनमोहक होगा।

कस्टम घाट के अलावा, रक्सौल प्रखंड के पनटोका और शहर के तुमड़िया टोला स्थित भकुवा ब्रह्म बाबा घाट पर भी दोनों देशों के लोगों के लिए विशेष तैयारी की जा रही है। इन घाटों पर भी वर्षों से दोनों ओर के लोग मिल-जुलकर छठ व्रत करते आ रहे हैं। रक्सौल नगर परिषद के वार्ड 6के पार्षद घनश्याम प्रसाद और वार्ड 5 के पार्षद जितेंद्र दत्ता ने बताया कि यह साझा परंपरा इस बार भी अक्षुण्ण रहेगी, जहाँ व्रती भारत और नेपाल के मैत्रीपूर्ण रिश्तों की बेहतरी और शांति-समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना करेंगे।

इस अवसर को और खास बनाने के लिए, मैत्री पुल को झालर बत्ती और रोशनी से सजाने-सँवारने की तैयारी भी जोरों पर है, जिससे पूरा सीमा क्षेत्र रोशनी से जगमगा उठेगा। 

इस साझा धार्मिक आयोजन के दौरान, भारतीय क्षेत्र में एसएसबी और कस्टम तथा नेपाली क्षेत्र में नेपाल आर्म्ड पुलिस और पुलिस बल सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्रिय हो गए हैं। यह पर्व ग्रामीण क्षेत्रों से एक दूसरे देश में आवाजाही और मेल-मिलाप का अवसर प्रदान करेगा।

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