Saturday, March 7

छठ पर्व पर देर रात्रि तक रक्सौल बाजार गुलजार,अब रक्सौल में ‘नाइट मार्केट’ की मांग ज़ोरों पर

व्यापारियों और आम जनता में उत्साह, वीरगंज की तर्ज़ पर देर रात तक बाज़ार सजाने की अपील


रक्सौल (पूर्वी चम्पारण)।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल का बाज़ार, जो लंबे समय से नेपाल की आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल तथा ऑनलाइन मार्केटिंग की चुनौतियों से जूझ रहा था, उसमें इस छठ पर्व के दौरान एक नई जान आ गई है। छठ के दौरान देर रात तक बाज़ार में रही रौनक और भीड़ ने स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों को एक नई उम्मीद दी है। अब सभी की मांग है कि शहर में ‘नाइट मार्केट’ (रात्रि बाज़ार) की अवधारणा को विकसित किया जाए।
बाज़ार के समय में बड़ा बदलाव
एक समय था जब डेढ़-दो दशक पहले तक रक्सौल का बाज़ार सुबह 5 बजे ही खुल जाता था। नेपाल की राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों और पहाड़ी जिलों से नेपाली ग्राहक भोर में ही यहां खरीदारी के लिए पहुंचने लगते थे। लेकिन, नेपाल की अस्थिरता और ऑनलाइन खरीददारी के बढ़ते चलन के कारण बाज़ार का मिजाज बदला। हाल के वर्षों में दुकानें सुबह 9-10 बजे के आसपास खुलती हैं और शाम 7-8 बजे बंद हो जाती हैं।
छठ ने दिखाया रात की रौनक का रास्ता
हालांकि, इस बार छठ पर्व ने इस धारणा को बदल दिया। पर्व के दौरान बाज़ार रात 10-11 बजे तक पूरी तरह से गुलजार रहा। खाने-पीने की दुकानों से लेकर फुटपाथ के छोटे-छोटे ठेलों तक हर जगह भारी भीड़ दिखी। युवा, युवतियां, महिलाएं और बच्चे सभी देर रात तक खरीदारी करते, घूमते-फिरते और खाते-पीते नज़र आए। इस उत्साहजनक माहौल ने व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों को भी उत्साहित किया है।
वीरगंज की तर्ज़ पर ‘नाइट मार्केट’ की मांग
इस सफलता से प्रेरित होकर, अब स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों ने ज़ोरदार मांग उठाई है कि प्रशासन रक्सौल में भी ‘नाइट मार्केट’ का कॉन्सेप्ट विकसित करे। लोगों का कहना है कि अगर शासन-प्रशासन शहर को साफ-सुथरा, विकसित बनाए और सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम करे, तो बाज़ार देर रात तक सज सकता है। इससे न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि महिलाएं और बच्चे भी बेखौफ होकर देर रात तक घूम-फिर सकेंगे, खरीदारी कर सकेंगे और शहर की रौनक बढ़ेगी।
स्थानीय लोगों ने नेपाल के वीरगंज शहर का उदाहरण दिया, जहां ‘नाइट बाज़ार’ की अवधारणा सफलतापूर्वक विकसित हुई है। वीरगंज का बाज़ार देर रात तक गुलजार रहता है, और वहां खरीदारी के लिए रक्सौल से भी लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
व्यापारियों का मानना है कि नाइट मार्केट से शहर की अर्थव्यवस्था को नया आयाम मिलेगा और रक्सौल को एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती व्यावसायिक केंद्र के रूप में उसकी पुरानी पहचान वापस मिलेगी। रक्सौल चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव राज कुमार गुप्ता ने भी जोर दे कर कहा कि ऐसी पहल होनी चाहिए।वहीं,अम्बेडकर ज्ञान मंच के संस्थापक एम.राम ने भी कहा कि शासन प्रशासन को इस पर गंभीर पहल करने की जरूरत है।जबकि,समाजिक कार्यकर्ता ई अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि यदि ऐसी पहल हुई तो दो शिफ्ट में बाजार चलेगा।जब मार्केट बंद हो जायेगा,तो,शाम आठ बजे से रात दस से बारह बजे तक नाइट मार्केट जम सकता है।यहां नेपाल से आने जाने वाले,रेल के यात्री,और लोकल लोग ,खास कर महिलाएं,बच्चे इस नाइट मार्केट के उपभोक्ता होंगे।इससे शहर की छवि भी निखरेगी। अब देखना यह है प्रशासन शहरवासियों की
इस मांग पर क्या कदम उठाता है।

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