
रक्सौल।(Vor desk)। एक ओर जहां एनडीए अपने प्रत्याशियों की सूची जारी करने की तैयारी में है,वहीं,इंडिया गठबंधन के सीट शेयरिंग का अंतिम फैसला हो गया है और उम्मीदवारी की सूची भी आज जारी होने की संभावना है।सूचना के मुताबिक, रक्सौल विधान सभा क्षेत्र-10 कांग्रेस के खाते में है।इस पर दावेदारी भी रोचक है।दावेदारों में आगे पूर्व मंत्री श्याम बिहारी प्रसाद,नुरुल्लाह खान,हाफिज अंसारी,डा. गौतम कुमार,अखिलेश दयाल,राज कुमार सिंह आदि शामिल हैं।इसके अलावा क्षेत्र के बाहर के कुछ लोगों के नाम भी चर्चे में है। चूंकि,जनता दल यू के बागी श्याम बिहारी प्रसाद ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है।ऐसे में पूर्व सहकारिता राज्य मंत्री श्री बिहारी के प्रबल उम्मीदवारी की जनचर्चा तेज है।उनकी लॉबिंग कथित रूप से पूर्णियां के सांसद पप्पू यादव कर रहे हैं।इसके अलावे राज्य सभा सदस्य सह कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह भी कर रहे हैं।अंदरूनी सूत्रों की माने तो सबसे आगे दौड़ में चल रहे साफ सुथरी छवि वाले पूर्व मंत्री श्याम बिहारी के नाम फाइनल होने में राजद ही ज्यादा अड़ंगा डाल रही है।राजद सूत्रों की माने तो गठबंधन में सीट कांग्रेस को चली गई है,लेकिन,राजद रक्सौल में महत्वपूर्ण भूमिका में रहेगी,क्योंकि,संगठन ज्यादा मजबूत है।ऐसे में ‘पैराशूट लैंडिंग’ के मुद्दे पर राजद इस दावेदारी पर सहमत नहीं है।वहीं,’ओल्ड एज फैक्टर ‘ भी आड़े आ रहा है।एक वरीय राजद नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि श्री बिहारी को उम्मीदवारी मिली,तो,राजद का ऊर्जावान समर्थन नहीं मिलेगा।उन्होंने बताया कि खुद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इस नाम पर सहमत नहीं हैं।उन्होंने सवाल किया कि इसकी क्या गारंटी है कि जीत के बाद श्री बिहारी पाला नहीं बदलेंगे?पूर्व कैबिनेट मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या के बाद राजद ने उन्हें1998में हुए उप चुनाव में आदापुर से टिकट दिया,वे सहकारिता राज्य मंत्री भी बने।बाद में वे जनता दल यू में शामिल हो गए और नरकटिया से विधायक भी बने।यही नहीं सवाल उनकी भाभी पूर्व सांसद सह लोक सभा की डिप्टी स्पीकर रमा देवी को ले कर भी,जो भाजपा में हैं।ऐसे में विश्वसनीयता का संकट कम नहीं है।वहीं,प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व भी दो खेमों में बंटा है।बीते दिनों राजद नेता सह पूर्व विधान सभा प्रत्याशी राम बाबू यादव ने सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को ले कर कांग्रेस की नीति पर सवाल उठाए और ‘मनी डीलिंग’ मामले में कांग्रेस सांसदों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इससे पूरे राज्य में शिकायत हो रही है।उन्होंने कार्यकर्ताओं को ही टिकट देने पर जोर दिया और कहा कि यदि इस बात को नहीं समझा गया तो महागठबंधन को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।इसके बाद इस तरह के उठ रहे बवंडर के बाद अब कांग्रेस आलाकमान भी सतर्क दिख रही है।अब कमान सीधे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के हाथों में है।चर्चा है कि टिकट बंटवारे में उनकी ही चलेगी।यदि ऐसा हुआ तो श्री बिहारी के दावेदारी पर ग्रहण भी लग सकता है।सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व इस बात की भी समीक्षा कर रही है कि रक्सौल से वर्ष 2015में निर्दलीय लड़ कर मात्र 21697 यानी13.4प्रतिशत वोट पाए श्याम बिहारी

मैदान में उतरने के बाद भाजपा के वोट बैंक कहे जाने वाले वैश्य समाज के वोटरों को वे कितना तोड़ पाएंगे,क्योंकि,इस राह के असली चुनौती तो क्षेत्रीय भाजपा सांसद डा संजय जायसवाल है,जो उन्हीं की बिरादरी के हैं और उनके लिए रक्सौल सीट प्रतिष्ठा का विषय है।हालांकि,आज राजद सुप्रीमो लालू यादव के नेतृत्व में राजद और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की संयुक्त बैठक में इसका फैसला होगा कि किसे टिकट मिलेगा।
युवाओं पर कांग्रेस की नजर
कांग्रेस और राहुल बिग्रेड इन दिनों बिहार में आने वाले दस वर्षों की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस दावे से सबसे आगे चल रहे दो नाम पूर्व मंत्री श्याम बिहारी प्रसाद और आदापुर से कांग्रेस के उम्मीदवार रह चुके बेदाग और व्यक्तित्व के धनी हाफिज अंसारी की उम्मीदवारी पर कैंची चल सकती है।

वैश्य चेहरे पर दांव
महागठबंधन नेतृत्व में राजद बार बार यादव प्रत्याशियों के हारने के बाद इस सीट से पिछले 2020के चुनाव में कन्नी काट कांग्रेस को यह सीट थमा दी।बावजूद इस सीट से राजद से कांग्रेस में आए राम बाबू यादव चुनाव लड़े और दूसरे स्थान पर रहे।तीसरे स्थान पर निर्दलीय सुरेश यादव रहे।दो यादव के भिड़ंत से हुए नुकसान के बाद पार्टी सतर्क है और अब वैश्य,मुस्लिम,दलित पर दाव लगाने की जुगत में है।मजबूत दलित उम्मीदवारी सामने नहीं आई है।जहां तक वैश्य उम्मीदवारी की चर्चा है कि इसमें कानू जाति के डा गौतम कुमार और कुम्हार जाति के अखिलेश दयाल मजबूत दावेदार हैं।लेकिन,पूर्व मंत्री श्याम बिहारी के पार्टी ज्वॉइन करने के बाद उनकी दावेदारी अग्र पंक्ति की है और टिकट मिलने पर घमासान की उम्मीद है।लेकिन,उनके नाम पर पार्टी से ले कर महागठबंधन में विरोध भी शुरू हो गया।डा गौतम कुमार के समर्थक कह रहे हैं कि वैश्य का मतलब केवल कलवार ही है?इस सीट पर कलवार की अपेक्षा कानू जाति का जनाधार काफी अधिक है,जो अति पिछड़ी जाति है।ऐसे में घमासान कम नहीं है।वैसे यह वोट बैंक भाजपा का है,इसलिए कई तरह से पार्टी समीक्षा में जुटी हुई है।युवा नेता अखिलेश दयाल पुराने कार्यकर्ता है,इसलिए वे खुल कर बाहरी उम्मीदवार के विरोध में है और उनकी दावेदारी भी मजबूत है।
मुस्लिम उम्मीदवारी पर नजर
यह सीट कांग्रेस की परंपरागत है।वर्ष 1952से 1990 तक कांग्रेस और 2000तक महागबंधन का गढ़ रहा है। जिसमें प्रथम विधायक राधा पांडे के बाद चार टर्म तक सगीर अहमद विधायक रहे और मंत्री भी बने।इसके बाद से रक्सौल को मंत्री पद नहीं मिला।साफ सुथरी छवि और ओजस्वी वक्ता स्व सगीर अहमद रक्सौल बाजार से थे और तिरवाह में भी पकड़ रखते थे। कांग्रेस इस लिहाज से सवार्धिक मुस्लिम आबादी वाले रक्सौल में इस बार मुस्लिम उम्मीदवार पर गंभीर हैं।समझा जा रहा है कि मुस्लिम उम्मीदवारी के प्रयोग से यादव की आपसी घमासान थमेगी और वोट बैंक भी मजबूत होगा,क्योंकि,बागी उम्मीदवारी पर मुस्लिम वोट बंटेगा नहीं।मुस्लिम दावेदारी में सबसे आगे हाफिज अंसारी और नुरुल्लाह खान चल रहे हैं।नुरुल्लाह खान रक्सौल बाजार से है और युवा होने के साथ विपक्ष की मुखर आवाज भी हैं,इस लिहाज से वे प्रबल दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं।
राजद की दावेदारी जारी
सीटिंग शेयरिंग के सवाल पर अभी मामला फंसा है, ऐसे में रिजल्ट की अदला-बदली हुई तो रक्सौल सीट राजद में जा सकती है। ऐसे में राजद के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल, पूर्व प्रत्याशी राम बाबू यादव और सुरेश यादव, रवि मस्करा, सैफुल आजम, सुनील कुशवाहा जैसे नाम चर्चा में हैं। उनका प्रयास है कि घर वापसी हो और टिकट मिले। ऐसे में सभी की नजर पार्टी का नेतृत्व और इंडिया अलायंस पर है।
क्या है स्थिति
वर्ष2000से लगातार रक्सौल भाजपा का कब्जा है।पांच टर्म विधायक रहे डा अजय सिंह का टिकट पिछले चुनाव में कट गया था।वर्ष2020में कुशवाहा जाति से आने वाले प्रमोद सिन्हा भारी मतों से विजयी हुए।वर्ष2025में उनकी दावेदारी मजबूत है और यहां एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन के बीच कड़े संघर्ष के आसार हैं।जनसुराज के कारण त्रिकोणीय जंग भी हो सकती हैं।
