Sunday, March 8

चुनावी प्रक्रिया को सशक्त और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक है कि इसमें सांप्रदायिकता, धनबल और बाहुबल की राजनीति को समाप्त किया जाए:डा.अभय कुमार

रक्सौल।(Vor desk)। राजनीति विज्ञान के प्रो. डा अभय कुमार ने कहा है कि चुनाव लोकतंत्र के लिए केवल इसलिए महत्वपूर्ण नहीं हैं कि इनके माध्यम से एक राजनीतिक दल सत्ता से बाहर होता है और दूसरा दल सरकार बनाता है। चुनाव का असली महत्व इस बात में है कि इस दौरान जनता नेताओं के विचारों, उनके वादों और उनके कामकाज का मूल्यांकन कर पाती है। यही वह समय होता है जब देश की राजनीति की दिशा तय होती है।

खासकर, यह वह अवसर होता है जब समाज के सबसे वंचित, दबे-कुचले और गरीब लोगों के कल्याण के लिए योजनाएँ और नीतियाँ तय की जाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मीडिया की भूमिका अत्यंत अहम होती है—वह मतदाताओं के सामने सही तथ्यों को रखता है और सभी पक्षों को निष्पक्षता से जनता तक पहुँचाता है।

चुनाव के दौरान यह प्रश्न भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि क्या समाज के वंचित तबकों को उचित और प्रभावी प्रतिनिधित्व मिल रहा है या नहीं। ऐसा न हो कि हाशिए के लोग केवल वोट डालते रहें और उनके वोटों से सत्ता पर प्रभुत्वशाली वर्ग के लोग ही पहुँचते रहें।

चुनावी प्रक्रिया को सशक्त और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक है कि इसमें सांप्रदायिकता, धनबल और बाहुबल की राजनीति को समाप्त किया जाए। चुनाव का केंद्र बिंदु रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतें होनी चाहिए।

लोकतंत्र की पहचान केवल चुनाव होना नहीं है, बल्कि शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और समान अवसर वाला चुनाव होना है—ऐसा चुनाव जिसमें समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति के उम्मीदवार को भी बराबरी का मौका मिले।

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