Sunday, March 8

नेपाल में बिगड़े हालातों के बीच नेपाल सेना ने थामी कमान,नेपाल के प्रधान सेनापति ने की वार्ता के साथ ही शांति,संयम, एकता बनाए रखने की अपील !

काठमांडू/वीरगंज।(Vor desk)। नेपाली सेना ने जेन-जेड (जनरेशन-जेड) विरोध प्रदर्शनों के बीच कायम अराजक स्थिति के मद्देनजर मंगलवार की रात्रि दस बजे से शांति सुरक्षा,सुशासन के उद्देश्य से देश का कमान अपने हाथ में ले लिया है।दरअसल,दो दिनों के आंदोलन में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई ।नेपाल में Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन फूंक दिया है। सुप्रीम कोर्ट में घुस गए।राष्ट्रपति भवन में भी आगजनी की।ऐसे में नेपाल की सेना महत्वपूर्ण सरकारी भवनों और संरचनाओं की सुरक्षा अपने हाथ में ले ली है।इसका मतलब है कि इन सारे जगहों पर अब सेना का नियंत्रण होगा।सेना प्रमुख के कमान संभालने के एलान के बाद काठमांडू सहित देश भर में सेना उतारने की कवायद भी शुरू कर दी गई है।

इससे पहले सेना प्रमुख अशोकराज सिग्देल ने राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रदर्शनकारी जेन-जी समूह से बातचीत के लिए आने का आग्रह किया है। मंगलवार की रात एक वीडियो संदेश जारी करते हुए, उन्होंने समूह से विरोध प्रदर्शन बंद करने और बातचीत में शामिल होने का आह्वान किया।
उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए जान-माल के अपूरणीय नुकसान पर भी गहरा दुख व्यक्त किया। सिग्देल ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक, निजी और राजनयिक संपत्ति की रक्षा करना हर किसी का कर्तव्य है, और कहा कि नेपाल सेना कठिन परिस्थितियों में भी नेपाल की स्वतंत्रता,संप्रभुता, भौगोलिक एकता, अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रही है।
उन्होंने संबंधित पक्षों से आगे के नुकसान को रोकने और शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी सभी गतिविधियों को रोकने का भी अनुरोध किया है।कहा कि वर्तमान में चल रहे आंदोलन के घटना क्रम का विश्लेषण किया जा रहा है।

नेपाली सेना ने लिखित बयान भी जारी किया है, जिसमे स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों से राष्ट्रीय एकता और संयम बरतने की अपील की है। सेना ने दोहराया है कि वह नेपाल के लोगों के जीवन और संपत्तियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। नेपाली सेना का यह बयान प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे और उनके देश छोड़कर भागने की अटकलों के बाद आया है। नेपाल में कई बड़े राजनेताओं के घरों पर भी हमले हुए हैं और उनके साथ मारपीट भी की गई है।जीएनजे के आंदोलन समाप्ति के ऐलान के बाद भी हिंसा,तोड़ फोड़,आगजनी , लूट पाट की स्थिति कायम है।

कितना उचित है संवैधानिक रूप से सेना की तैनाती ?

नेपाल के संविधान में अनुच्छेद 267 के तहत सेना की तैनाती दो तरह से निर्धारित की गई है। पहला, उप-अनुच्छेद 4 के तहत, सेना को विकास कार्यों, आपदा प्रबंधन या अन्य संघीय कानूनी कार्यों के लिए तैनात किया जा सकता है। दूसरा, उप-अनुच्छेद 6 के तहत युद्ध, बाहरी आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह या गंभीर आर्थिक व्यवधान की स्थिति में राष्ट्रपति, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की सिफारिश और कैबिनेट के फैसले के आधार पर सेना की तैनाती की जा सकती है।बता दे कि नेपाल के संविधान के अनुसार राष्ट्रपति को नेपाल सेना का सर्वोच्च कमांडर भी नामित किया गया है।सैन्य परिचालन के प्रति तर्क है कि मौजूदा अशांति और जन सुरक्षा को खतरे को देखते हुए, अनुच्छेद 267(4) या 267(6) के तहत सेना की तैनाती संवैधानिक रूप से उचित है।

नेपाल के प्रधान सेनापति जनरल सिग्देल की शिक्षा भारत और चीन में

दिसंबर 2024 में जनरल सिग्देल भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए थे।जनरल सिग्देल शिवपुरी स्थित आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज से ग्रेजुएट हैं। ग्रेजुएशन के बाद वे चीन की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने गए।चीन में ही बैचलर और फिर स्ट्रैटेजिक स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की। लेकिन, नेपाली आर्मी चीफ जनरल सिग्देल ने भारत में भी ट्रेनिंग ली है। उन्‍होंने भारत के आर्मी वॉर कॉलेज में हायर एंड मैनेजमेंट कोर्स और डिफेंस मैनेजमेंट कोर्स किया है।

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