
रक्सौल।(Vor desk)।भारत नेपाल सीमा पर अवस्थित अंतराष्ट्रीय शहर रक्सौल राष्ट्रीय वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण फिसड्डी साबित हुआ है ।स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-2025 में राज्य स्तर पर 96 वा रैंक मिला है,जो मोतिहारी और बेतिया के मुकाबले में कहीं नहीं है।शहरी क्षेत्र में स्वच्छता में हुई प्रगति के आंकलन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे के लिए आई टीम के द्वारा विभिन्न माप दंडों के आधार पर किए गए सर्वे के बाद यह रैंकिंग जारी की गई है।हालाकि,पिछले बार के सर्वे के मुकाबले रक्सौल नगर का परफॉर्मेंस सुधरा है।
रक्सौल नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ई मनीष कुमार ने बताया कि रक्सौल को राज्य स्तर पर 96 और राष्ट्रीय स्तर पर 745 वा रैंक प्राप्त हुआ है। रक्सौल नगर में साफ सफाई ,सौंदर्यीकरण,सहित अन्य मापदंडों पर बेहतर बनाने की लगातार प्रयास जारी है।उन्होंने आशा जताई कि आने वाले समय में रक्सौल का रैंकिंग बेहतर होगा।इसको दृष्टिगत करते हुए 2025 -2026 के लिए1अरब 34करोड़97लाख 33हजार 220रुपए का वार्षिक बजट नगर परिषद बोर्ड ने सर्व सम्मति से पारित किया गया है।
जानकारी के मुताबिक,पिछले बार वर्ष2023-2024 में राज्य स्तर पर 108 और राष्ट्रीय स्तर पर 3906 वा रैंक था।इसकी तुलना में परफॉर्मेंस में काफी सुधार हुआ है,लेकिन,अव्वल होने की दौड़ में यह शहर कही नहीं दिखता।
इसको ले कर पूर्व नगर पार्षद सह स्टैंडिंग कमेटी सदस्य रहीं शबनम आरा ने कहा कि करीब 42 हजार वोटर वाला रक्सौल केंद्र और राज्य स्तर पर उपेक्षित रहा है।इसके चतुर्दिक उत्थान और जीवन स्तर सुधार के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।अटल कैबिनेट ने इसे मॉडल टाउन बनाने की योजना बनाई थी,लेकिन,कोई प्रगति नहीं हो सकी।
स्वच्छ रक्सौल संस्था के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि रक्सौल पिछड़ेपन की शिकार है,आपार संभावनाओं और सुधार की गुंजाइश के बावजूद इसके दयनीय हालत पर तरस आती है।स्वच्छता सर्वेक्षण में उम्मीद से ज्यादा रैंकिंग मिल गया है,नागरिकों से पूछिएगा तो बदहाली की कहानी सुनाएंगे।जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों को कोसेंगे। नेपाली नागरिक और देशी विदेशी पर्यटक थू थू कर जाते हैं,जो शर्मनाक है।
गौरतलब हैं कि सीमा पर अवस्थित अंतराष्ट्रीय शहर रक्सौल की तुलना अक्सर नेपाल के वीरगंज से होती है,जहां जाते ही विदेश पहुंचने का अहसास होता है।इसकी टीस रक्सौल ही नहीं देश के किसी कोने से भी आए भारतीयों को होती है।मैत्री पुल से शंकराचार्य द्वार यानी नेपाल गेट की ओर बढ़ते ही स्ट्रीट लाइट की रंगीन रोशनी,साफ सफाई,मनोरम वातावरण स्वत: आकर्षित करता है। जबकि,इसके विपरीत रक्सौल नगर में स्ट्रीट लाइट ,साफ सफाई ,सुविधा जैसे मानकों पर सवाल खड़े किए जाते हैं।
बता दे कि केंद्र सरकार शहरों के बीच स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए हर साल ऐसा सर्वे कराती है इसमें
कचरा प्रबंधन, सफाई व्यवस्था, नागरिकों की भागीदारी और शौचालयों की स्थिति जैसे कई मापदंडों पर शहरों का मूल्यांकन किया जाता है।
स्वच्छता सर्वेक्षण के 9वें वर्ष में प्रवेश करते हुए इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में 4500 से अधिक शहरों को शामिल किया गया था। इनमें स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और निस्तारण समेत 10 मापदंडों और 54 इंडीकेटर्स पर शहरों को परखा जाता है।
