
रक्सौल।(Vor desk)।रक्सौल एक ऐसा शहर जो महात्मा गांधी की कर्मभूमि चंपारण के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है, ने समय-समय पर कई महान विभूतियों को जन्म दिया है। इन्हीं में से एक हैं स्वर्गीय सगीर अहमद,जिनकी पुण्यतिथि पर उन्हें रक्सौल में शिद्दत से याद किया गया।उनका व्यक्तित्व ,सादगी,वक्तृत्व कला ,राजनीतिककुशलता आज भी याद करने लायक है।
जीवन परिचय
सगीर अहमद का जन्म हाजी जाहिर हुसैन साहब के परिवार में हुआ था। वह अपने पाँच भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रामपुर (यूपी) में हुई और आगे की पढ़ाई दरभंगा के मिल्लत कॉलेज में पूरी की।
देशभक्ति और सामाजिक सेवा
सगीर अहमद में देश सेवा का जज्बा कूट-कूट कर भरा था। वह एक प्रखर वक्ता थे और उनकी भाषण कला ने उन्हें एक अद्वितीय पहचान दिलाई। सन् 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, जब उनकी उम्र मात्र 18-19 साल थी, उन्होंने अपनी देशभक्ति का परिचय दिया।वह एक सच्चे नेता थे जिन्होंने हमेशा अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा की। उनकी पहचान हिन्दू-मुस्लिम एकता के सच्चे पैरोकार के रूप में की जाती है।
विपरीत लहर में भी जीत
सन् 1965 में भारत पाक युद्ध के समय उनकी उम्र बमुश्किल 18-19 साल की रही होगी, उस समय भी देशभक्ति का जज़्बा इनके रोम-रोम से टपकता था । उन्होंने अपने पहले सार्वजनिक भाषण में लोगों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया था तथा राजनीतिक पंडितों एवं लोगों को भावी नेता की झलक उनके व्यक्तित्व में मिल गयी थी । सन् 1972 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर बिहार विधानसभा के लिए रक्सौल विधानसभा क्षेत्र से भारी मतों से विजय हुए। सन 1972 से 1990 तक लगातार चार बार रक्सौल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया जो उनकी लोकप्रियता का धोतक था। सन 1977 में जब कांँग्रेस को मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी के अभ्युदय से काँग्रेस पार्टी की शाख गिरने के बावजूद बाद वे अपनी रक्सौल की सीट को बचाने में कामयाब हो गये।
मंत्री बने,संगठन में जिम्मेवारी भी संभाली
जगन्नाथ मिश्रा के मुख्यमंत्रित्व काल में उन्हें कैबिनेट में जगह मिली तथा उन्हें सहकारिता राज्य मंत्री का स्वतंत्र प्रभार मिला साथ ही वे दूसरी बार उन्होंने कानून एवं आवास मंत्रालय का प्रभार भी संभाला था। भागवत झा के मुख्यमंत्रित्व काल में उन्हें अल्पसंख्यक एवं वित्तीय निगम के चेयरमैन का भी दायित्व मिला था जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। बिहार काँग्रेस ( ई) में अतुलनीय योगदान को विशेष कर प्रदेश सचिव के रूप में पार्टी को मजबूत करने में उनकी भूमिका को आज भी पुराने कांग्रेसी बड़ी शिद्दत से याद कर सराहे बगैर नहीं रह पाते हैं। उनकी लोकप्रियता एवं प्रखर वक्ता के रूप में ऐसी ख्याति थी कि वे बिहार विधानसभा में स्पीकर के रूप में मनोनीत हो जाने वाले थे लेकिन किन्हीं राजनीति कारणों से विधान सभा स्पीकर बनने से वंचित रह गये। उनके विधायक रहते रक्सौल में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांँधी, वित्त मंत्री के रूप में प्रणव मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी समेत बहुत सारे दिग्गज राष्ट्रीय नेताओं का दौरा हुआ था। कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ तिवारी एवं पूर्व रेल मंत्री केदार पाण्डेय इनके राजनीतिक गुरु रहे तथा उन्हीं की प्रेरणा एवं सलाह से वे अपना शानदार राजनीतिक सफर जारी रखते हुए
कई जनहित कार्यों को मूर्त रूप दिया।
विरासत
आज भी, सगीर अहमद की विरासत जीवित है। उनकी याद में लोग आज भी उनके आदर्शों और सिद्धांतों को अपनाते हैं। वह एक सच्चे देशभक्त और सामाजिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने अपने जीवन को समाज की सेवा में समर्पित कर दिया।आज की राजनीति के परिपेक्ष्य में वे एक उदाहरणीय शख्शियत थे,जिनके जैसा दुबारा कोई नहीं मिल सका।
निष्कर्ष
सगीर अहमद की पुण्यतिथि पर, हम उनकी याद में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनकी देशभक्ति, सामाजिक सेवा और राजनीतिक जीवन हमें प्रेरित करते हैं। वह एक सच्चे नेता थे जिन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया।
