
रक्सौल। (VOR desk)। सीमावर्ती क्षेत्र रक्सौल के सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन (MDM) की गुणवत्ता एक बार फिर विवादों के घेरे में है। ताजा मामला रक्सौल प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, लौकहा से सामने आया है, जहाँ एनजीओ द्वारा परोसे गए दाल-तड़का में मरा हुआ कीड़ा मिलने से स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया। जैसे ही बच्चों की नजर दाल में पड़े कीड़े पर पड़ी, उन्होंने खाना खाने से साफ इनकार कर दिया और अपनी थालियां हटा दीं।
यह समस्या केवल इसी एक विद्यालय तक सीमित नहीं है। दरअसल, रक्सौल प्रखंड के नगरीय और आसपास के लगभग 39 विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की आपूर्ति की जिम्मेदारी एक ही एनजीओ को सौंपी गई है। स्थानीय सूत्रों और शिक्षकों के अनुसार, इस संस्था द्वारा सप्लाई किए जा रहे खाने की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। भोजन का स्तर इतना घटिया है कि अधिकांश विद्यालयों में बच्चों ने अब स्कूल का खाना छोड़ दिया है। अभिभावकों का कहना है कि दाल पतली और बेस्वाद होती है, और अब कीड़ा मिलने जैसी घटनाओं ने बच्चों की सेहत को लेकर गहरा डर पैदा कर दिया है।
हैरानी की बात यह है कि भोजन की इस बदहाली का सीधा असर अब स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर भी पड़ने लगा है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को खींचने और उनके पोषण के लिए चलाई जा रही यह महत्वाकांक्षी योजना, एनजीओ की लापरवाही और प्रशासनिक अनदेखी के कारण दम तोड़ती नजर आ रही है। अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बार-बार की शिकायतों के बावजूद एनजीओ पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है,हालाकि,एनजीओ के प्रतिनिधियों से संपर्क नहीं होने से उनका पक्ष सामने नहीं आ सका है।फिलहाल,इस वाक्या के बाद अब सवाल यह उठता है कि क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है या बच्चों की सेहत के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर रोक लगाई जाएगी।
