Monday, March 16

रक्सौल में रसोई गैस का महासंकट: अस्पताल की ‘दीदी की रसोई’ से लेकर अनाथालयों तक चूल्हे ठंडे होने की कगार पर


​रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल शहर इन दिनों एक भीषण मानवीय संकट के मुहाने पर खड़ा है। रसोई गैस (एलपीजी) की भारी किल्लत ने शहर की जीवन-रफ्तार को थाम दिया है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि अब इसका सीधा असर मरीजों के निवाले और बेसहारा महिलाओं के भोजन पर पड़ने लगा है। रक्सौल अनुमंडल अस्पताल में संचालित ‘दीदी की रसोई’ का स्टॉक अब खत्म होने की कगार पर है। अस्पताल के कुक महेश प्रसाद और केयर टेकर शरीता कुमारी ने बताया कि अब एक भी सिलेंडर शेष नहीं बचे हैं। यदि तत्काल आपूर्ति नहीं हुई, तो मरीजों के लिए गर्म भोजन और दूध की व्यवस्था ठप हो जाएगी। अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या और गैस का अभाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। जीविका के बीपीएम विक्रम कुमार ने पुष्टि की है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और स्थानीय प्रशासन को पत्राचार किया गया है।
​गैस का यह अकाल केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक संस्थाओं की कमर भी तोड़ रहा है। ‘माहेर ममता निवास’ में रह रहीं 50से ज्यादा असहाय महिलाओं के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। प्रबंधक वीरेंद्र कुमार का कहना है कि गैस सिलेंडर खत्म होने से रसोई बंद होने की नौबत आ गई है। इसी तरह ‘समर्पण सेवा संस्था’ के शंभू चौरसिया और साइमन रेक्स ने बताया कि सेवा कार्यों के लिए भी अब उन्हें विवश होकर लकड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो न केवल कष्टदायक है, बल्कि प्रदूषण का भी कारण है।

​व्यावसायिक जगत में भी कालाबाजारी ने तबाही मचा रखी है। ‘पंकज स्वीट्स’ के संचालक राजेश बाधवानी का कहना है कि जो कॉमर्शियल सिलेंडर 1450 रुपये में मिलता था, अब उसे निजी स्तर पर 3400 रुपये तक में बेचा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि इस महंगाई और आपूर्ति की कमी के बीच प्रतिष्ठान चलाना अब संभव नहीं रह गया है।लगता है ईद के पहले ही व्यवसाय ठप्प हो जाएगा,जबकि,हम विश्वसनीयता और कीमतों में उलट फेर नहीं कर सकते।होटल और चाय-नाश्ते के छोटे व्यवसाई भी अपनी रोजी-रोटी छिन जाने से भारी आक्रोश में हैं। पान मंडी में दुखी होटल के संचालक राजेश कुमार ने बताया कि हम कमर्शियल गैस यूज करते हैं,वह भी नहीं मिल रही या बहुत महंगी मिल रही है।सरकार ध्यान नहीं दे रही,इससे काफी मुश्किल है।कारोबार पर तो संकट है ही, रोजी रोटी पर भी आफत पड़ सकता है।बताते है कि इस किल्लत का असर चाय, समोसा,जलेबी की कीमत पर भी पड़ चुका है,अभी से ही मूल्य में इजाफा किए जा चुके हैं।

​भले ही रक्सौल के एसडीओ मनीष कुमार ने हाल ही में गैस एजेंसियों का औचक निरीक्षण कर स्थिति सामान्य होने का आश्वासन दिया हो, लेकिन जमीनी हकीकत दावों के बिल्कुल उलट है। आम जनता का कहना है कि प्रशासन के आश्वासन और धरातल पर दिख रही कालाबाजारी के बीच एक बड़ा अंतर है। शहर की जनता अब सवाल कर रही है कि क्या उन्हें बुनियादी जरूरतों के लिए भी कालाबाजारियों के आगे घुटने टेकने होंगे? यदि समय रहते एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में रक्सौल का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

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