
बीरगंज (नेपाल) | ब्यूरो रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में मंगलवार को बीरगंज स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें नारी शक्ति के सामर्थ्य और उनके अतुलनीय योगदान का उत्सव मनाया गया। यह कार्यक्रम न केवल महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देने का माध्यम बना, बल्कि एक अधिक समावेशी और न्यायसंगत समाज के निर्माण के संकल्प का साक्षी भी बना।

कार्यक्रम में सीमावर्ती क्षेत्र की प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रख्यात शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रभावशाली महिलाओं ने बड़ी संख्या में शिरकत की। इस अवसर पर आयोजित विचार-गोष्ठी में वक्ताओं ने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए आधुनिक समाज में महिलाओं द्वारा तय किए गए मील के पत्थरों पर चर्चा की। वक्ताओं ने एक स्वर में माना कि शिक्षा और सशक्तिकरण ही वे अमोघ अस्त्र हैं, जिनसे महिलाओं के समक्ष खड़ी चुनौतियों का समाधान संभव है।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक पहलू भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत का संगम रहा। ज्ञानदा एकेडमी स्कूल, बीरगंज और शारदा कला केंद्र, रक्सौल की छात्राओं ने अपनी मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दोनों देशों के बीच सदियों पुराने अटूट सांस्कृतिक संबंधों और समृद्ध लोक परंपराओं को जीवंत कर दिया। छात्राओं के नृत्य और कलात्मक प्रदर्शन ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और आयोजन में चार चाँद लगा दिए।

समारोह के मुख्य अतिथि एवं भारतीय महावाणिज्य दूत श्री देवी सहाय मीना ने अपने संबोधन में महिलाओं द्वारा राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को अमूल्य बताया। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “महिला सशक्तिकरण महज एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्र की उन्नति का मुख्य आधार है। जब एक महिला सशक्त होती है, तो पूरा समाज और राष्ट्र स्वतः ही समृद्ध हो जाता है।” उन्होंने महिलाओं की प्रगति के बिना एक न्यायसंगत समाज की कल्पना को असंभव करार दिया।
इस गरिमामय आयोजन का उद्देश्य लैंगिक समानता की अलख जगाना और महिलाओं के सामर्थ्य को नई पहचान देना था। कार्यक्रम ने महिलाओं की उपलब्धियों को एक सशक्त मंच प्रदान किया और भविष्य में सामूहिक भागीदारी के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का मार्ग प्रशस्त किया। समारोह का समापन समाज के प्रति समर्पित महिलाओं के प्रति आभार व्यक्त करने और सामूहिक एकजुटता के संकल्प के साथ हुआ।
