
वीरगंज।(Vor desk)। नेपाल की आर्थिक जीवनरेखा माने जाने वाले त्रिभुवन राजपथ (काठमांडू-पथलैया-वीरगंज) के अंतर्गत वीरगंज क्षेत्र में सड़क विस्तार को लेकर वर्षों से जारी कानूनी गतिरोध अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने सड़क विस्तार के खिलाफ दायर रिट याचिका को सिरे से खारिज करते हुए रविवार को फैसले का पूर्ण पाठ सार्वजनिक कर दिया है। न्यायाधीश विनोद शर्मा और महेश शर्मा पौडेल की संयुक्त पीठ द्वारा सुनाए गए इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब सड़क विभाग के लिए वीरगंज के मुख्य मार्ग को केंद्र बिंदु से दोनों ओर 25-25 मीटर तक चौड़ा करने का कानूनी रास्ता साफ हो गया है।
न्यायालय ने अपने विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया है कि त्रिभुवन राजपथ की सड़क सीमा वर्ष 1964 और 1977 (2021 व 2034 विक्रम संवत) में नेपाल राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक सूचना के आधार पर दशकों पहले ही निर्धारित की जा चुकी थी। अदालत ने माना कि चूँकि यह सीमा ‘जग्गा प्राप्ति ऐन 1977’ (2034) के अस्तित्व में आने से पूर्व ही तय थी, इसलिए सड़क किनारे स्थित भूमि पर स्थानीय निवेदकों के निजी स्वामित्व और मुआवजे के दावों को कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यदि स्थानीय नगरपालिका से नक्शा पास कराया गया है, तब भी सड़क विभाग की पूर्व अनुमति के बिना राजमार्ग की 25-25 मीटर की सीमा के भीतर किया गया कोई भी निर्माण अवैध ही माना जाएगा।
ज्ञात हो कि भरत प्रसाद रौनियार, विमल कुमार अग्रवाल और अशोक कुमार अग्रवाल सहित दर्जनों स्थानीय निवासियों ने संपत्ति के संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए सड़क विभाग के उस निर्देश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें 25-25 मीटर का क्षेत्र खाली करने का आदेश दिया गया था। निवेदकों का तर्क था कि बिना उचित मुआवजा और पुनर्वास नीति के उनके आवासों को ध्वस्त करना अनुचित है। हालांकि, न्यायालय ने न्यायिक निरंतरता के सिद्धांतों और पूर्व में दिए गए समान मामलों के फैसलों को आधार बनाते हुए सड़क विभाग की विस्तार कार्रवाई को पूरी तरह से कानूनसम्मत और जनहित में ठहराया है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद अब वीरगंज के मुख्य मार्ग से अतिक्रमण हटाने और सड़क निर्माण कार्य के तेजी से शुरू होने की प्रबल संभावना है। जहां एक ओर प्रभावित गृह-स्वामियों में इस कठोर फैसले को लेकर निराशा है, वहीं दूसरी ओर व्यापारिक समुदाय और आम नागरिकों का एक बड़ा वर्ग इसे शहर के व्यापक विकास, यातायात को सुगम बनाने और दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए एक अनिवार्य कदम मान रहा है। इस फैसले ने वर्षों से अटके पड़े वीरगंज के विकास कार्यों को एक नई दिशा और गति प्रदान की है।
