
रक्सौल (पूर्वी चम्पारण)।(Vor desk)।सीमावर्ती शहर रक्सौल में ‘खास महाल’ भूमि को लेकर प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस ने शहर के व्यापारियों और आम नागरिकों की नींद उड़ा दी है। बुधवार को इस गंभीर मुद्दे पर परमानंद मरोदिया और मुन्ना प्रसाद के नेतृत्व में भू-स्वामियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम चम्पारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल से मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
क्या है पूरा मामला?
प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को अवगत कराया कि उप समाहर्ता (मोतिहारी) द्वारा थाना संख्या–07, खाता संख्या–168 एवं 170 की भूमि को अचानक “खास महाल” घोषित कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रशासन ने वर्तमान भू-स्वामियों को नोटिस जारी कर सख्त निर्देश दिए हैं:
- सलामी राशि: 30 वर्षों की लीज के लिए प्रति डिसमिल ₹26 से ₹27 लाख जमा करने का आदेश।
- वार्षिक लगान: कुल राशि का 5% सालाना लगान तय किया गया है।
- अल्टीमेटम: राशि जमा न करने की स्थिति में भूमि पर सरकारी कब्जा करने की चेतावनी दी गई है।
व्यापारियों और रैयतों में भारी रोष
ज्ञापन सौंपते हुए प्रतिनिधियों ने कहा कि रक्सौल एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। प्रशासन के इस आदेश से शहर के पुराने रैयतों और व्यवसायियों में भय और असमंजस का माहौल है। उन्होंने तर्क दिया कि वे वर्षों से इन जमीनों के वैध मालिक रहे हैं, ऐसे में इतनी बड़ी धनराशि की मांग करना और बेदखली की धमकी देना अनुचित है।
”यह आदेश शहर की आर्थिक कमर तोड़ देगा। हमने सांसद महोदय से इस दंडात्मक कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने और वैध भू-स्वामियों के हितों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की मांग की है।” — प्रतिनिधिमंडल
सांसद का आश्वासन
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इस मुद्दे को संबंधित उच्च अधिकारियों और राज्य सरकार के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कहा कि मामला गंभीर है और जनता के हितों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार अभी नियम बनाने में जुटी है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख लोग
इस अवसर पर मुख्य रूप से रजनीश प्रियदर्शी, अतुल कुमार, सरदार रणवीर सिंह, उमेश सिकारिया सहित शहर के कई गणमान्य भू-स्वामी और व्यवसायी उपस्थित थे।
