Saturday, March 7

भारत-नेपाल सीमा पर चला प्रशासन का डंडा: नो मेन्स लैंड से बुलडोजर एक्शन के बीच हटाया गया अवैध अतिक्रमण

​रक्सौल ।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और सीमांकन की रक्षा के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को रक्सौल के वार्ड नंबर 7 स्थित प्रेम नगर मुहल्ले में ‘नो मेन्स लैंड’ पर दशकों से काबिज अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। एसडीएम मनीष कुमार और एसडीपीओ मनीष आनंद के नेतृत्व में चली इस मुहिम में करीब 15 अवैध घरों और दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया।

​भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
​अनुमंडल प्रशासन की इस टीम में अंचलाधिकारी (सीओ) शेखर राज और हरैया थानाध्यक्ष किसन पासवान दलबल के साथ शामिल थे। अभियान के दौरान उन सभी संरचनाओं को हटा दिया गया जिन्हें पूर्व में अंचल कार्यालय द्वारा की गई नापी और सर्वे में अवैध पाया गया था। प्रशासन की इस कार्रवाई से सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया है।

​15 दिनों की मोहलत के बाद चला बुलडोजर
​एसडीएम मनीष कुमार ने बताया कि नो मेन्स लैंड पर किसी भी तरह का निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा, “नापी के बाद अतिक्रमणकारियों को चिन्हित कर 15 दिनों का नोटिस दिया गया था कि वे स्वयं अपनी संरचनाएं हटा लें। समय सीमा समाप्त होने के बावजूद जब अवैध निर्माण नहीं हटाए गए, तब प्रशासन को बल प्रयोग करना पड़ा।”

​क्यों जरूरी है नो मेन्स लैंड का खाली रहना?

​अधिकारियों के अनुसार, भारत-नेपाल सीमा पर दोनों ओर 10-10 गज की दूरी को ‘नो मेन्स लैंड’ के रूप में खाली रखा जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
​सीमा पहचान: निर्माण होने से सीमा के निर्धारित पिलर और चिन्ह मिटने का खतरा रहता है।
​राष्ट्रीय सुरक्षा: घनी आबादी या अवैध निर्माण के कारण असामाजिक और भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
​पेट्रोलिंग में आसानी: अतिक्रमण मुक्त होने से सुरक्षा बल (SSB) आसानी से सीमा की निगरानी कर सकते हैं।

​इन चीजों का था जमावड़ा

​बताया गया कि नो मेन्स लैंड पर लोगों ने फूस की झोपड़ियां, मवेशियों के लिए खूंटे-नाद, गुमटीनुमा दुकानें और गैरेज बना रखे थे। यहां तक कि वाहनों के पंचर बनाने और कबाड़ की दुकानें भी धड़ल्ले से चल रही थीं, जिन्हें पूरी तरह साफ कर दिया गया है।

​उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया था फैसला

​गौरतलब है कि बीते 31 जनवरी को एसएसबी 47वीं बटालियन कैंप में पूर्वी चंपारण के डीएम सौरभ जोरवाल और एसपी की मौजूदगी में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इसमें सीमा सुरक्षा को लेकर नो मेन्स लैंड को खाली कराने का कड़ा निर्देश दिया गया था, जिसके आलोक में आज रक्सौल प्रशासन ने यह कार्रवाई सुनिश्चित की।

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