Saturday, March 7

केन्द्रीय नीतियों के खिलाफ रक्सौल में फूटा आक्रोश, भारत बंद के दौरान विरोध प्रदर्शन-धरना!

रक्सौल।(Vor desk)। केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में 12 फरवरी 2026 को आहूत राष्ट्रव्यापी ‘भारत बंद’ का असर सीमावर्ती शहर रक्सौल में भी देखा गया। देश के दस प्रमुख ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित इस हड़ताल को किसान, मजदूर, छात्र और युवाओं का समर्थन प्राप्त हुआ। विरोध प्रदर्शन के कारण भारत-नेपाल को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण काठमांडू-दिल्ली मुख्य राजमार्ग के रक्सौल खंड पर आवागमन आंशिक रूप से बाधित रहा।वहीं, नगर परिषद के जन सुविधा केंद्र के समक्ष आयोजित इस धरने और विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (ऐक्टू) के महासचिव सह ऑल इंडिया म्युनिसिपल एंड सैनिटेशन वर्कर्स फेडरेशन के केंद्रीय सचिव चंद्रशेखर कुमार ने किया।

​इस आंदोलन का मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए चार नए श्रम कोड, बिजली विधेयक 2025, बीज कारखाना अधिनियम 2025 और मुक्त व्यापार कार्यक्रमों के प्रति असंतोष है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कॉमरेड चंद्र शेखर सिंह ने कहा कि सरकार की ये नीतियां पूरी तरह से श्रमिक और किसान विरोधी हैं। ज्ञात हो कि सरकार ने 21 नवंबर 2025 से पुराने 29 श्रम कानूनों को समाहित कर चार नए कोड—वेतन कोड, औद्योगिक संबंध कोड, सामाजिक सुरक्षा कोड और व्यावसायिक सुरक्षा कोड—लागू करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने दावा किया है कि इससे देश के 40 करोड़ कर्मचारियों को लाभ होगा, लेकिन श्रमिक संगठनों का आरोप है कि ये कानून केवल बड़े उद्योगपतियों के हितों को साधने के लिए बनाए गए हैं।

​रक्सौल में हुए इस विरोध प्रदर्शन में नगर परिषद के स्थायी व दैनिक सफाई कर्मी, संविदा मजदूर और विभिन्न ट्रेड यूनियनों के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में मांग की कि नए लेबर कोड को तत्काल रद्द किया जाए, पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए और श्रमिकों के लिए सम्मानजनक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया और किसान-मजदूर विरोधी बिलों को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा। इस प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार की नीतियों के प्रति श्रमिक वर्ग के गहरे असंतोष को उजागर कर दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected , Contact VorDesk for content and images!!