Saturday, March 7

रक्सौल अनुमंडल अस्पताल में जन संवाद: मरीजों की समस्याओं का होगा त्वरित समाधान, जल्द खुलेगा हेल्प डेस्क

रक्सौल।(Vor desk)। बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी सात निश्चय-3 कार्यक्रम के अंतर्गत ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ अभियान के तहत रक्सौल अनुमंडल अस्पताल में शुक्रवार को जन संवाद का आयोजन किया गया। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. स्वाति सपन की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मरीजों की जमीनी समस्याओं को समझना और उनका मौके पर ही निस्तारण करना था। इस अवसर पर स्वास्थ्य प्रबंधक आशीष कुमार, मूल्यांकन एवं अनुश्रवण सहायक जय प्रकाश कुमार तथा लेखापाल शिल्पी कुमारी की उपस्थिति में दर्जनों मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की गई।

​उपाधीक्षक कार्यालय में आयोजित इस सुनवाई के दौरान मरीजों ने मुख्य रूप से ओपीडी पंजीकरण के लिए लंबी कतारों में होने वाले विलंब, पैथोलॉजी जांच की धीमी प्रक्रिया और अस्पताल में दवाओं की समय पर उपलब्धता न होने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए। ग्रामीण क्षेत्रों से आए कई मरीजों ने यह भी साझा किया कि अस्पताल परिसर में उचित मार्गदर्शन के अभाव में उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग भटकना पड़ता है, जिससे काफी परेशानी होती है।

​इन समस्याओं पर त्वरित संज्ञान लेते हुए उपाधीक्षक डॉ. स्वाति सपन ने बड़ी घोषणा की कि अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर जल्द ही ‘मे आई हेल्प यू’ (May I Help You) काउंटर की स्थापना की जाएगी। इस काउंटर के माध्यम से मरीजों को अस्पताल के सभी विभागों, सेवाओं और उपलब्ध संसाधनों की सटीक जानकारी दी जाएगी, ताकि उन्हें अनावश्यक भाग-दौड़ न करनी पड़े। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि दवा काउंटर पर भीड़ कम करने और पैथोलॉजी जांच की रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

​डॉ. सपन ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों के साथ ‘गुड बिहेवियर’ (मधुर व्यवहार) अपनाने का सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अस्पताल का लक्ष्य है कि यहाँ आने वाले गरीब और असहाय मरीज बेहतर अनुभव के साथ वापस लौटें। उल्लेखनीय है कि इस अस्पताल में प्रतिदिन 400 से अधिक मरीज उपचार हेतु पहुंचते हैं, जिनमें महिलाओं और निर्धन वर्ग की बड़ी संख्या होती है। अस्पताल प्रशासन ने शुद्ध पेयजल और बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जिससे आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार की उम्मीद जगी है।

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