
रक्सौल: अनिरुद्धाचार्य जी महाराज की भागवत कथा शुरू, उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब
रक्सौल (पूर्वी चंपारण)।(Vor desk)। सीमावर्ती शहर रक्सौल स्थित हवाई अड्डा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ का भव्य शुभारंभ गुरुवार को हुआ।प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने कथा के पहले दिन के प्रवचन और आध्यात्मिक आयोजन में हिस्सा लेने के लिए बिहार और पड़ोसी देश नेपाल से भारी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु रक्सौल पहुंचे।
भगवान का स्वरूप ‘सच्चिदानंद’ है
कथा की शुरुआत करते हुए महाराज जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भगवान के वास्तविक स्वरूप को समझने का मार्ग है। उन्होंने समझाया कि ईश्वर ‘सच्चिदानंद’ स्वरूप हैं—अर्थात वह सत, चित और आनंद का संगम हैं। संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार उन्हीं के विधान से संभव है।
द्रौपदी प्रसंग: ‘सच्चा सहारा केवल ईश्वर’
अनिरुद्धाचार्य जी ने द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग का सजीव वर्णन करते हुए भक्तों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा, “जब संकट के समय द्रौपदी ने अपनों को पुकारा, तो कोई आगे नहीं आया। लेकिन जैसे ही उन्होंने पूर्ण समर्पण के साथ गोविंद को याद किया, भगवान ने तत्काल प्रकट होकर उनकी लाज बचाई।” उन्होंने जोर देकर कहा कि संसार में कोई भी रिश्ता शाश्वत नहीं है, सच्चा सहारा केवल परमात्मा ही हैं।
सांसारिक संपत्ति नहीं, राम नाम है असली धन
सामाजिक कुरीतियों और मोह-माया पर प्रहार करते हुए कथावाचक ने कहा कि लोग बेटा-बेटी या भौतिक संपत्ति को ही सच्चा धन मान लेते हैं, जो कि उचित नहीं है। उन्होंने मीराबाई के प्रसिद्ध भजन का उदाहरण दिया:
”पायो जी मैंने राम रतन धन पायो…”
उन्होंने बताया कि सांसारिक वस्तुएं क्षणभंगुर (नष्ट होने वाली) हैं, जबकि राम नाम का धन ही व्यक्ति के साथ परलोक तक जाता है। भगवान से प्रेम करना ही मनुष्य का सबसे बड़ा सौभाग्य है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित होने और महाराज जी की लोकप्रियता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं।कथा प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक आयोजित होना है।आयोजन समिति ने उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यापक पंडाल और स्वयंसेवकों की तैनाती की है।
