
-बड़ी कार्रवाई: पूर्वी चंपारण पुलिस और STF ने मेजरगंज में छापेमारी कर पकड़ी 25 लाख की जाली मुद्रा, नोट छापने की हाई-टेक मशीनें जब्त
रक्सौल/मोतिहारी।(Vor desk)।
इंडो-नेपाल सीमा पर सक्रिय अंतरराष्ट्रीय जाली मुद्रा तस्करों के खिलाफ पूर्वी चंपारण पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। पुलिस ने न केवल जाली नोटों की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया, बल्कि सीमावर्ती सीतामढ़ी के मेजरगंज में चल रही नकली नोटों की एक अत्याधुनिक ‘फैक्ट्री’ को भी ध्वस्त कर दिया है। इस ऑपरेशन में 3 नेपाली नागरिकों सहित कुल 10 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।कुल 25लाख नेपाली जाली मुद्रा और 18हजार500भारतीय जाली मुद्रा बरामद हुआ है।इसके साथ ही 22बंडल नोट छापने के लिए तैयार व्हाइट पेपर,केमिकल आदि बरामद हुए हैं।गैग द्वारा धंधे के लिए प्रयुक्त होने वाले तीन बाइक और एक कार भी बरामद किए गए हैं।इतनी बड़ी मात्रा में नेपाली जाली नोट की बरामदगी काफी चौंकाने वाली है।आशंका है कि इसका इस्तेमाल नेपाल में आगामी5मार्च को होने वाले आम चुनाव में वोटरों को लुभाने के लिए किए जाने थे।बरामद नेपाली नोट में 1000के जाली नोट हैं।
*सीमा पर घेराबंदी से शुरू हुआ ऑपरेशन
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि रक्सौल बॉर्डर के रास्ते जाली नोटों की एक बड़ी खेप नेपाल भेजी जा रही है। मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर रक्सौल एसडीपीओ मनीष आनंद और हरैया थानाध्यक्ष किशन कुमार पासवान के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने पनटोका पंचायत के समीप बॉर्डर पिलर संख्या 393 के पास जाल बिछाया। सबसे पहले बाइक सवार दो नेपाली नागरिकों—तिलक बहादुर थापा (मकवानपुर, नेपाल) और सरोज कुमारी महतो (नवलपरासी, नेपाल)—को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से 18,500 रुपये की भारतीय जाली मुद्रा बरामद हुई।

*मेजरगंज में मिला नकली नोटों का ‘किला’
गिरफ्तार तस्करों की निशानदेही पर मोतिहारी और सीतामढ़ी पुलिस ने संयुक्त रूप से मेजरगंज इलाके में छापेमारी की। वहां का नजारा देख पुलिस दंग रह गई। एक गुप्त ठिकाने पर फिल्मी अंदाज में नकली नोट छापने का सेटअप लगा था। पुलिस ने वहां से लगभग 25 लाख रुपये की नेपाली जाली मुद्रा बरामद की।
*छापेमारी में बरामद सामग्री:
नकली करेंसी: 25 लाख नेपाली रुपये और 18,500 भारतीय रुपये,जो जाली हैं।
असली मुद्रा :1लाख40हजार रुपए नेपाली मुद्रा भी बरामद हुए है।
मशीनरी: हाई-टेक प्रिंटिंग मशीनें, स्कैनर, पेपर कटर।
कच्चा माल: जाली नोट छापने का विशेष कागज और उच्च गुणवत्ता वाली स्याही।
वाहन: एक चार पहिया वाहन और तीन मोटरसाइकिल।
*कॉर्पोरेट की तरह बंटा था काम
जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह किसी संगठित कंपनी की तरह काम करता था। इसमें ‘उत्पादन टीम’ नोट छापने का काम करती थी, ‘लॉजिस्टिक्स टीम’ नोटों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाती थी और ‘मार्केटिंग एजेंट’ इन्हें भीड़भाड़ वाले ग्रामीण बाजारों और साप्ताहिक हाटों में असली नोटों के बीच खपा देते थे।
*गिरफ्तारी की सूची और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
पुलिस ने इस मामले में अब तक 10 शातिर अपराधियों को जेल भेजा है। अधिकारियों के मुताबिक, इस गिरोह के तार केवल नेपाल ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से भी जुड़े होने के संकेत मिले हैं। एसडीपीओ मनीष आनंद ने बताया कि गुप्त सूचना पर टीम गठित हुई ।अंतरजिला अभियान में यह बड़ी सफलता मिली है। यह सिंडिकेट आर्थिक सुरक्षा को चुनौती दे रहा था।ये कम पैसे ले कर ज्यादा जाली नोट डिलीवर करते थे।वहीं,केमिकल का प्रयोग कर यह गिरोह ठगी भी करता था।इस कार्रवाई से सीमा पार जाली मुद्रा के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
”STF, एसएसबी और जिला पुलिस के समन्वय से यह बड़ी सफलता मिली है। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के मास्टरमाइंड और अब तक बाजार में खपाई गई मुद्रा का पता लगाया जा सके।”
— स्वर्ण प्रभात, एसपी, मोतिहारी
