Saturday, March 7

रक्सौल से वीरगंज तक ‘शिक्षा सेतु’ की 37 वर्षीय साधना: प्रो० किरण बाला की विदाई और निःशुल्क शिक्षण का संकल्प!

​वीरगंज (नेपाल)।(Vor desk)। रक्सौल से वीरगंज तक का सफर केवल भौगोलिक सीमा पार करना नहीं था, बल्कि एक ऐसी शैक्षणिक विरासत बुनना था जिसने भारत-नेपाल मैत्री को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया। ठाकुर राम बहुमुखी क्याम्पस की प्रतिष्ठित वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञ प्रो० (डा०) किरण बाला ने 37 वर्षों की गरिमामयी सेवा के बाद शनिवार को सेवानिवृत्ति ली। संयोग से उनका जन्म दिन भी था।इसलिए सिद्धार्थ दियालु होटल में आयोजित अभिनंदन समारोह खास बन गया। शुभकामनाओं के बीच इस ऐतिहासिक और भव्य समरोह में उन्होंने घोषणा की कि शिक्षक कभी ‘रिटायर्ड’ नहीं होता, इसलिए वे अपनी अगली पारी विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा देने के लिए समर्पित करेंगी।


​स्वर्ण पदक विजेता प्रो० बाला ने भावुक होते हुए याद किया कि वे मात्र एक वर्ष के लिए बतौर ‘गेस्ट टीचर’ वीरगंज आई थीं, लेकिन यहाँ के विद्यार्थियों के प्रेम और अनुशासन ने उन्हें यहीं का होकर रहने दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “पैसा कहीं से भी कमाया जा सकता है, लेकिन ,पैसे के लिए शिक्षा देना जरूरी नहीं।जो संतोष और सम्मान मुझे नेपाल में मिला, वह अतुलनीय है। यदि मैं बिहार में होती तो शायद वनस्पति विज्ञान की मूल बातें भी भूल चुकी होती, लेकिन यहाँ मेरा विभाग एक ‘आइडियल’ विभाग बना और बच्चे निरंतर टॉप करते रहे।”


​समारोह की अध्यक्षता नेपाल भारत सहयोग मंच के अध्यक्ष अशोक बैद ने की और मुख्य अतिथि भारतीय महावाणिज्य दूत श्री देवी सहाय मीणा ने उन्हें राष्ट्र निर्माण की धुरी बताया। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के सदस्य प्रो० (डा०) अनिल कुमार सिन्हा ने उनकी सेवा को साधना की संज्ञा दी। वरिष्ठ पत्रकार एवं सत्याग्रह संस्था के संस्थापक चंद्रकिशोर झा , वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के उपाध्यक्ष माधव राजपाल ने कहा कि प्रो० बाला ने रक्सौल से वीरगंज आकर जो ‘शिक्षा सेतु’ तैयार किया है, वह नेपाल की शैक्षणिक व्यवस्था में भारतीय योगदान का एक अविस्मरणीय अध्याय है।वहीं, रक्सौल नगर की कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी ने कहा कि एक शिक्षक के साथ कर्मठ और धर्म परायण महिला के रूप में डा किरण बाला उदाहरणीय हैं। निःशुल्क शिक्षा की घोषणा सराहनीय है।


​इस गौरवशाली अवसर पर प्रो० चंद्रमा सिंह, प्रो० राजकिशोर सिंह, जगदीश शर्मा, पूर्व क्याम्पस चीफ प्रो० रणजीत यादव,प्रो० कन्हैया झा,डा० उमेश चौरसिया, मनीष सिंह (MD, नेशनल इंफोटेक), प्रो० डा० विद्यानंद प्रसाद, प्रो० राय यतीन्द्र प्रसाद, नगर पार्षद अनुरागनी देवी,पूर्व पार्षद सुरेश साह,गुड्डू सिंह, ई० जितेन्द्र कुमार, मनोज शर्मा,संतोष छात्रवंशी, राम शर्मा,ग्रुप कैप्टन राजीव रंजन, ई० रितेश कुमार, ई० पल्लवी पुष्पम और ई० केशव आदित्य सहित अनेक प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे। प्रो० मनीष दूबे के सफल संचालन में संपन्न हुए इस समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रो० बाला का जीवन उन सभी के लिए एक अनुकरण है जो समाज के लिए कुछ सार्थक करना चाहते हैं।

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