Saturday, March 7

बैंक मैनेजर की मौत या ‘सोची-समझी’ साजिश? जंजीर से लटका मिला शव, शरीर के जख्म खोल रहे हैं राज

​रामगढ़वा (पूर्वी चंपारण)।(Vor desk)।: उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के एक होनहार अधिकारी की मौत ने पुलिस और पब्लिक दोनों को उलझा दिया है। सुगौली के करमवा रघुनाथपुर शाखा के प्रबंधक जीतेंद्र कुमार का शव रामगढ़वा में उनके किराए के कमरे में लोहे की भारी जंजीर (सिकड़) से लटका मिला। पहली नजर में यह मामला खुदकुशी का लग सकता है, लेकिन शरीर पर मौजूद निशानों और मौके से गायब हुए किरदारों ने इसे एक ‘सस्पेंस मर्डर मिस्ट्री’ में बदल दिया है।

गले पर निशान नहीं, पीठ पर जख्म: यह कैसी आत्महत्या?

​इस पूरे मामले में सबसे बड़ा ‘ट्विस्ट’ चोट के निशान हैं। मृतक के भाई कृष्णा कुमार ने पुलिसिया थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
​अजीबोगरीब फंदा: आमतौर पर लोग कपड़े या रस्सी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यहाँ लोहे की जंजीर (सिकड़) का प्रयोग किया गया।

​मेडिकल विसंगति: परिजनों का दावा है कि जीतेंद्र की छाती और पीठ पर गहरी चोट के निशान हैं, जबकि फंदे से लटकने के बावजूद उनकी गर्दन पर कोई स्पष्ट निशान नहीं मिला। यह तथ्य संकेत देता है कि शायद मौत फंदे से नहीं, बल्कि मारपीट की वजह से हुई हो।


पत्नी और साली का ‘गायब’ होना:
पुलिस पर उठे सवाल
​घटना के वक्त जीतेंद्र की पत्नी वंदना कुमारी और उनकी साली घर में ही मौजूद थीं। जैसे ही शोर मचा, भीड़ इकट्ठा हुई, लेकिन परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मुख्य संदिग्धों (पत्नी और साली) को हिरासत में लेने के बजाय उन्हें वहां से जाने का मौका दे दिया।

​परिजनों का सवाल: “अगर वे बेगुनाह थीं, तो हमारे पहुंचने से पहले उन्हें वहां से क्यों जाने दिया गया? और पुलिस ने शव उतारते समय वीडियोग्राफी क्यों नहीं कराई?”

​. विवादों की पुरानी कहानी और ‘छठ’ का आखिरी झगड़ा

​जीतेंद्र और वंदना की शादी 2018 में हुई थी, लेकिन उनके बीच सुलह कभी नहीं हो पाई।

​पारिवारिक कलह: पत्नी अक्सर जीतेंद्र पर अपने माता-पिता से अलग रहने का दबाव बनाती थी।

​पुलिस तक पहुँचा था मामला: यह कलह इतनी गंभीर थी कि पहले भी कई बार मामला स्थानीय थाने तक पहुँचा था।

​आखिरी मुलाकात: अंतिम बार छठ पूजा पर जब जीतेंद्र घर आए थे, तब भी भारी विवाद हुआ था और वंदना झगड़ा कर अपने मायके (तमकुही राज, यूपी) चली गई थी।


पुलिस की जांच और ‘साक्ष्य’ का इंतजार
​रक्सौल एसडीपीओ मनीष आनंद और थानाध्यक्ष राजीव कुमार साह अब दोहरे दबाव में हैं। मामले को सुलझाने के लिए पुलिस इन तीन मोर्चों पर काम कर रही है:
​FSL रिपोर्ट: फॉरेंसिक टीम ने मौके से फिंगरप्रिंट्स और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं।
​डिजिटल फुटप्रिंट: जीतेंद्र और उनकी पत्नी के मोबाइल का CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) निकाला जा रहा है ताकि घटना से पहले हुई बातचीत का पता चले।
​CCTV फुटेज: मकान मालिक प्रमोद पांडेय के घर और आसपास लगे कैमरों की जांच की जा रही है ताकि पता चले कि रात 9 बजे से पहले घर में कौन आया और कौन गया।
​निष्कर्ष: पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
​क्या बैंक मैनेजर ने घरेलू कलह से तंग आकर लोहे की जंजीर को गले लगाया, या फिर एक सुनियोजित साजिश के तहत उनकी हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप दिया गया? इसका जवाब अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की वैज्ञानिक जांच में छिपा है। दो मासूम बेटियों (5 वर्ष और 3 वर्ष) के सिर से पिता का साया उठ चुका है, और पूरा बड़कागांव (पकड़ीदयाल) अब इंसाफ की गुहार लगा रहा है।

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