
डीजीसीए और एएआई को बाधाएं हटाने के लिए भेजा गया अनुरोध; रैयतों को नोटिस जारी, जल्द भरेगी उड़ान
रक्सौल (पूर्वी चंपारण)।(Vor desk)।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल एयरपोर्ट के विस्तार की वर्षों पुरानी प्रतीक्षा अब समाप्त होने की ओर है। मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा के अंतर्गत इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। प्रशासन ने भू-अर्जन के एवज में रैयतों को मुआवजा भुगतान करने की कार्रवाई युद्धस्तर पर प्रारंभ कर दी है, जिससे क्षेत्र के विकास को नए पंख मिलने की उम्मीद जगी है।
आपत्तियों का निपटारा और अवार्ड की घोषणा
अनुमंडल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, भूमि अधिग्रहण हेतु अधिघोषणा के प्रकाशन के बाद प्राप्त हुई सभी आपत्तियों का विधिवत निराकरण सफलतापूर्वक कर लिया गया है। अवार्ड (मुआवजा राशि) की घोषणा के उपरांत अब संबंधित भू-स्वामियों को नोटिस निर्गत किए जा रहे हैं। जहाँ आवश्यक हुआ है, वहाँ आपत्तियों के आधार पर रिकॉर्ड में सुधारात्मक कदम भी उठाए जा रहे हैं, ताकि पारदर्शी तरीके से भुगतान सुनिश्चित हो सके।
हवाई बाधाओं को हटाने की कवायद तेज
परियोजना की तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए ओएलएस (ऑब्स्टेकल लिमिटेशन सरफेस) सर्वेक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
- चिन्हीकरण: सर्वेक्षण में जो बाधाएं (Obstacles) चिन्हित की गई हैं, उनके स्वामित्व की पहचान की जा रही है।
- पत्राचार: इन बाधाओं को हटाने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से आवश्यक अनुरोध किया जा चुका है।
व्यापार और पर्यटन को मिलेगी नई ऊँचाई
रक्सौल एयरपोर्ट केवल पूर्वी चंपारण ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल और पश्चिमी चंपारण के लिए भी सामरिक व आर्थिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस एयरपोर्ट के शुरू होने से रक्सौल को सीधा हवाई संपर्क (Air Connectivity) प्राप्त होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों में उछाल आएगा और पर्यटन के नए अवसर सृजित होंगे।
“प्रशासन का पूरा ध्यान समयबद्ध तरीके से मुआवजा भुगतान और अधिग्रहण प्रक्रिया को पूरा करने पर है। एयरपोर्ट निर्माण से पूरे चंपारण के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।” — जिला प्रशासन, पूर्वी चंपारण
