Saturday, March 7

बेतिया राज की ‘परती’ भूमि पर उगेगी उद्योगों की फसल: रक्सौल और रामगढ़वा के लिए 665 एकड़ का महा-प्लान तैयार


​मोतिहारी/रक्सौल/रामगढ़वा।(vor desk)। चंपारण की धरती पर अब बेतिया राज की ऐतिहासिक जमीनें विकास के नए इंजन को रफ्तार देंगी। बिहार की एनडीए सरकार ने नए साल में पूर्वी चंपारण के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार की है। रामगढ़वा के अहिरौलिया में एक विशाल मेगा फूड पार्क और रक्सौल में इंडस्ट्रियल हब बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) ने बेतिया राज की कुल 665 एकड़ भूमि का भौतिक सत्यापन कर इसका विस्तृत ब्लूप्रिंट राज्य सरकार को भेज दिया है।
​रामगढ़वा: अहिरौलिया और दुबौलिया में 560 एकड़ का इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र रामगढ़वा प्रखंड का अहिरौलिया और दुबौलिया इलाका होगा। यहाँ काठमांडू दिल्ली एशियन हाईवे 42ए से सटे पिपरपाती रोड के दोनों किनारों पर फैली लगभग 560 एकड़ जमीन पर मेगा फूड पार्क का खाका खींचा गया है। झाड़ियों और बंजर अवस्था में पड़ी इस जमीन को अब खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए विकसित किया जाएगा। कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए यहाँ की सड़कों को फोरलेन मानकों के अनुरूप चौड़ा करने का भी प्रस्ताव है।

​रक्सौल: सीमावर्ती क्षेत्र में हरदिया और कनना बनेंगे औद्योगिक केंद्र
अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे रक्सौल के हरदिया में 80 एकड़ और कनना गांव में 25 एकड़ जमीन पर औद्योगिक हब विकसित किया जाएगा। प्रशासन ने यहाँ चिन्हित जमीनों से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्सौल की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहाँ फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगने से नेपाल और भारत के बीच होने वाले व्यापार को एक नया आयाम मिलेगा।

​पलायन पर प्रहार और किसानों को दोहरा लाभ

स्थानीय स्तर पर इस घोषणा ने नई उम्मीदें जगा दी हैं। रक्सौल के समाजसेवी भरत प्रसाद गुप्त का कहना है कि उद्योगों की स्थापना से युवाओं को जिले में ही काम मिलेगा, जिससे दिल्ली-पंजाब होने वाला पलायन थमेगा। वहीं, क्षेत्र के वरिष्ठ उद्योगपति महेश अग्रवाल,राजन गुप्ता, कृष्णा प्रसाद,संजय जायसवाल आदि ने बताया कि चंपारण में लीची, केला और अनाज जैसे कच्चे माल की कोई कमी नहीं है। ऐसे में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगने से न केवल उद्योगों को मुनाफा होगा, बल्कि बिचौलियों के खत्म होने से किसानों की जेब तक सीधा लाभ पहुँचेगा।

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