
रक्सौल।(Vor desk)। स्थानीय अनुमंडल अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष पहल के तहत प्रसव उपरांत भर्ती महिलाओं के लिए जागरूकता सह प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. स्वाति सपन के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा माताओं को ‘शिशु सुरक्षा किट’ का वितरण किया गया, जिसमें नवजात शिशुओं के लिए बेबी कंबल सहित कई अन्य आवश्यक सामग्रियां शामिल थीं।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. स्वाति सपन ने प्रसूताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जन्म के शुरुआती दिन शिशु के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत संवेदनशील होते हैं। उन्होंने संक्रमण से बचाव के लिए गर्भनाल को साफ और सूखा रखने, प्रत्येक तीन घंटे के अंतराल पर स्तनपान कराने और शिशु को ठंडी हवा से बचाकर उचित तापमान में रखने के महत्व को समझाया। साथ ही, उन्होंने माताओं को पीलिया के लक्षणों, सांस लेने में तकलीफ या अत्यधिक सुस्ती जैसे आपातकालीन संकेतों के प्रति सचेत किया, ताकि समय रहते चिकित्सीय सहायता ली जा सके।

इसी क्रम में अस्पताल उपाधीक्षक ने मेडिकल टीम के साथ पोस्ट नेटल वार्ड का सघन निरीक्षण भी किया। उन्होंने विशेष रूप से उन महिलाओं के स्वास्थ्य की स्थिति जानी, जिनका बीती रात सर्जन डॉ. विजय कुमार और डॉ. विकास कुमार की देखरेख में सफल सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था। इनमें पूर्वी चंपारण के बंजरिया निवासी निशा देवी और भेलाही की कमलावती देवी शामिल थीं। फिलहाल दोनों माताएं और उनके नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉ. स्वाति ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्सों को सख्त निर्देश दिए कि वे वार्ड में भर्ती हर धात्री माता को शिशु देखभाल की बारीकियों से अनिवार्य रूप से अवगत कराएं।
अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि इस तरह के प्रशिक्षण का नियमित उद्देश्य अभिभावकों को स्वास्थ्य संबंधी बारीकियों के प्रति शिक्षित करना और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर सर्जन सह चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार, स्वास्थ्य प्रबंधक आशीष कुमार, लेखापाल शिल्पी कुमारी, मूल्यांकन एवं अनुश्रवण सहायक जय प्रकाश कुमार, स्टाफ नर्स स्वीटी कुमारी और मनीषा कुमारी सहित कई अन्य स्वास्थ्य कर्मी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।
