Saturday, March 7

रक्सौल में करेंसी एक्सचेंज सेंटर खोलने की उठी मांग: पीएमओ ने स्वीकार किया प्रतिवेदन, व्यापारियों और पर्यटकों को मिलेगी राहत

रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय महत्व के शहर रक्सौल में एक आधिकारिक करेंसी एक्सचेंज सेंटर (मुद्रा विनिमय केंद्र) स्थापित करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस संबंध में प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. स्वयंभू शलभ द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेजे गए एक विस्तृत प्रतिवेदन को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत स्वीकार कर लिया गया है। इस पहल का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र में मुद्रा विनिमय की समस्याओं को दूर कर व्यापार को स्थिरता प्रदान करना है।

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और व्यापार पर असर

डॉ. शलभ ने अपने प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि रक्सौल देश का दूसरा सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट (ICP) होने के साथ-साथ हजारों विदेशी पर्यटकों की आवाजाही का प्रमुख केंद्र है। यहां भारतीय स्टेट बैंक, पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे एक दर्जन से अधिक राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार द्वारा अधिकृत एक भी मुद्रा विनिमय केंद्र नहीं है। इसके अभाव में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अपनी विदेशी या नेपाली मुद्रा को भारतीय रुपयों में बदलने के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

अवैध ‘बट्टे’ से धराशायी हो रहा स्थानीय व्यापार

प्रतिवेदन में भारत-नेपाल सीमा पर नेपाली करेंसी के अनधिकृत लेन-देन और अस्थिर विनिमय दर (बट्टा) पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। डॉ. शलभ के अनुसार, रक्सौल के बाजार में नेपाली ग्राहकों की बड़ी भागीदारी है, लेकिन अधिकृत विनिमय केंद्र न होने से विनिमय दर का कोई मानक तय नहीं है। मनमाने ‘बट्टे’ के कारण नेपाली ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ता है और व्यापारियों के लिए भी लाभ का सही आकलन करना कठिन हो जाता है। मुद्रा के मूल्य में लगातार होने वाले उतार-चढ़ाव से वस्तुओं की स्थानीय कीमतें प्रभावित हो रही हैं, जिससे रक्सौल का व्यापार लगातार पिछड़ रहा है और व्यापारी यहां से पलायन करने को मजबूर हैं।

सट्टेबाजी पर लगाम और आर्थिक स्थिरता की मांग

डॉ. शलभ ने विश्लेषण किया है कि विनिमय दर की अस्थिरता न केवल वित्तीय जोखिम को बढ़ाती है, बल्कि बाजार में सट्टेबाजी को भी प्रोत्साहित करती है। इससे कृषि और औद्योगिक उत्पादों की लागत बदल जाती है, जिसका सीधा असर भारत-नेपाल के बीच होने वाले आयात-निर्यात पर पड़ता है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से रक्सौल में किसी बैंक या अधिकृत एजेंसी को मुद्रा विनिमय के लिए नामित करने की मांग की है।

​पीएमओ द्वारा इस प्रतिवेदन को संज्ञान में लिए जाने के बाद अब स्थानीय व्यापारियों और आम जनता में एक उम्मीद जगी है कि रक्सौल के व्यापारिक परिदृश्य में जल्द ही सकारात्मक बदलाव आएगा।

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