
सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने दिया भरोसा—मुख्यमंत्री की ‘समृद्धि यात्रा’ में उठेगा मामला, किसी के साथ नहीं होगा अन्याय
बेतिया राज की जमीन पर ‘अतिक्रमणकारी’ के नोटिस से हड़कंप,रैयतों की चीख पर आश्वासनों का मुलम्मा!
रक्सौल।(Vor desk)। बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद जहां चारों ओर विजय उत्सव का माहौल है, वहीं गांधी के कर्म भूमि चंपारण के रक्सौल में एक बड़े आबादी क्षेत्र पर ‘उजड़ने’ का खतरा मंडराने लगा है। बेतिया राज की जमीन को लेकर प्रशासन द्वारा शुरू की गई कानूनी कार्रवाई ने हजारों परिवारों की नींद उड़ा दी है।अब तक सैकड़ों लोगों को नोटिस थमाइ जा चुकी है।इसने लोगों में भारी रोष और असुरक्षा का भाव पैदा कर दिया है।बुधवार को रक्सौल में आयोजित अभिनंदन समारोह के दौरान यह दर्द उस वक्त छलक उठा, जब जीत की खुमारी के बीच स्थानीय निवासियों के समूह ने सांसद और विधायक के सामने अपनी व्यथा रखी।लोगों की असली पीड़ा यह है कि बिहार में एनडीए सरकार की वापसी के बाद उजाड़ने की कारवाई बढ़ाई जा रही है।बेतिया राज संपत्ति विधेयक, 2024 से संबंधित गजट के प्रकाशन के साथ ही बेतिया राज की चल अचल संपत्ति पर राज्य सरकार का कानूनी अधिकार कायम हो गया है। 26 नवंबर 2024को यह विधेयक विधानमंडल के दोनों सदनों में पारित किया गया था।विधान सभा चुनाव2025 तक चुप्पी साधने वाली सरकार के द्वारा जीत के बाद एकबारगी फाइल खोले जाने से खलबली मच गई है।लोगों को ‘बुलडोजर एक्शन ‘का डर सता रहा है,जिससे निपटने के लिए लोग ‘जान देंगे,लेकिन, जमीन नहीं ‘तक के नारे बुलंद कर रहे हैं!

एक ओर अभिनंदन दूसरे ओर छलका दर्द
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह क्षेत्रीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल और नवनिर्वाचित विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा का मौजे ब्रह्म स्थान में बैंड-बाजे और फूलों की बारिश के साथ भव्य स्वागत हुआ।वहीं,शहर के राम जी चौक स्थित सत्यनारायण पंचायती मंदिर में भाजपा द्वारा आयोजित व्यवसाई सम्मेलन सह अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित हुआ।जीत के उत्साह से सराबोर जन प्रतिनिधि इस स्वागत से गद्गद नजर आए, लेकिन इसी जश्न के बीच स्थानीय निवासियों ने अपनी पीड़ा भी साझा की।जदयू के जिला उपाध्यक्ष सह पूर्व नगर पार्षद सुरेश साह की अगुवाई में करीब 300 प्रभावित भू-धारकों ने जन प्रतिनिधियों को एक ज्ञापन सौंपा।पीड़ा व्यक्त करने वाले ज्यादातर एनडीए और जनप्रतिनिधियों के समर्थक ही नजर आ रहे थे।उन्होंने अपनी समस्या को मजबूती से रखा। लोगों ने भारी मतों से विजयी बनाकर भेजे गए अपने प्रतिनिधियों को बताया कि बेतिया राज के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने सांसद और विधायक से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और उनकी वर्षों पुरानी बसावट को उजड़ने से बचाने की गुहार लगाई।

8सूत्री ज्ञापन के मुख्य बिंदु: क्यों परेशान हैं रक्सौल के निवासी?
रक्सौल के भू-धारकों ने प्रशासन द्वारा निर्गत नोटिसों को पूरी तरह अवैध बताते हुए इन्हें तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है। नागरिकों का सबसे बड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि प्रशासन ने बिना किसी जमीनी जांच या उनका पक्ष सुने, उन्हें एकतरफा ‘अतिक्रमणकारी’ और ‘अतिचारी’ (Trespasser) घोषित कर दिया है।
ज्ञापन के माध्यम से यह आपत्ति दर्ज कराई गई है कि मोतिहारी कार्यालय द्वारा जारी पत्रांक 774 के तहत पूर्वजों की रैयती भूमि को जबरन ‘खास महल’ की श्रेणी में डालकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। लोगों का तर्क है कि जिस जमीन पर उनके परिवार सदियों से बसे हैं और जिनकी रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज , तथा नगर पालिका होल्डिंग पिछले सौ वर्षों से कायम है, उसे प्रशासन द्वारा नजरअंदाज करना मौलिक अधिकारों का हनन है। ऐतिहासिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए निवासियों ने याद दिलाया कि 1952 में बिहार सरकार द्वारा निर्मित ‘रजिस्टर 02’ (टू) में इन जमीनों का विधिवत समायोजन किया गया था, जो आज भी सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा है।लगातार माल गुजारी और होल्डिंग टैक्स का भुगतान होता रहा है।
प्रशासनिक शर्तों को अव्यावहारिक बताते हुए भू-धारकों ने कहा कि एक डिसमिल जमीन के लिए 26 लाख रुपये जैसी अत्यधिक लीज राशि का निर्धारण आम जनता की कमर तोड़ने वाला है। ऊपर से मात्र 30 वर्षों के लिए लीज इकरारनामा करने का दबाव देना अन्यायपूर्ण है। नोटिस में 30 जनवरी 2026 तक की जो अत्यंत कम समय सीमा तय की गई है, उससे पूरे शहर में भय और भारी मानसिक तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासियों ने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार से मांग की है कि दशकों पुराने वैध मालिकाना हक का सम्मान किया जाए और इस मनमानी कानूनी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।

सांसद ने दिया आश्वासन:सीएम के समक्ष रखा जाएगा मामला,नहीं होने दी जाएगी किसी को तकलीफ!
ज्ञापन स्वीकार करते हुए सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने लोगों को ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि मामला संवेदनशील है और वे इसके कई तकनीकी पहलु हैं। सांसद ने कहा कि ”17 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ‘समृद्धि यात्रा’ पर पूर्वी चंपारण आ रहे हैं। उनके साथ दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय सिन्हा (भूमि एवं राजस्व मंत्री)भी होंगे। हम इस गंभीर समस्या को उनके समक्ष रखेंगे। अभी केवल विधेयक पास हुआ है, कोई पूर्ण कानून नहीं बना है, ऐसे में एडीएम स्तर से नोटिस कैसे जारी हो रहा है ,इस पर चर्चा होगी। जिनका नाम रजिस्टर-2 में है और जिनके पास रजिस्ट्री है, उनका पक्ष मजबूत है। हम किसी को तकलीफ नहीं होने देंगे।”
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन की कमी न हो, इसके लिए माफियाओं द्वारा किए गए ‘अवैध’ कब्जों का खाली होना भी जरूरी है।सांसद ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1897 से पहले की जमीनों को मान्यता दी है,लेकिन भू-माफिया इसका गलत फायदा उठाने में जुटे हैं।सांसद ने भरोसा दिलाया कि वे इस मामले को उचित फोरम पर उठाएंगे और इसका ऐसा समाधान निकाला जाएगा जो रैयातों के हित में हो। उन्होंने जनता से अपील की कि वे ज्यादा परेशान न हों, सरकार उनके साथ न्याय करेगी। समाधान रैयातों के अनुकूल ही निकलेगा।
