Saturday, March 7

रक्सौल में बेतिया राज की जमीन को लेकर हड़कंप: प्रशासन ने थमाया करोड़ों की ‘सलामी’ का नोटिस, आंदोलन की तैयारी

​रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्रमुख व्यापारिक शहर रक्सौल इस वक्त एक बड़े प्रशासनिक और सामाजिक संकट के मुहाने पर खड़ा है। बेतिया राज की ‘खास महल’ भूमि को लेकर जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई नोटिस प्रक्रिया ने पूरे शहर में बेचैनी पैदा कर दी है। प्रशासन ने सैकड़ों वर्षों से बसे परिवारों और व्यापारियों को ‘अतिचारी’ (अवैध कब्जाधारी) करार देते हुए उन्हें जमीन खाली करने या फिर करोड़ों की भारी-भरकम राशि चुकाकर नई लीज लेने का अल्टीमेटम दिया है।

​अतिचारी घोषित होने से आक्रोश, पुश्तों से रह रहे परिवारों पर दबाव
शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में रहने वाले सैकड़ों लोगों को मिले इस नोटिस ने उन परिवारों की नींद उड़ा दी है, जो यहाँ अपनी कई पीढ़ियों से रह रहे हैं।प्रशासन लगातार नोटिस थमा रही है,जिन्हें नोटिस मिला है उनकी नींद हराम हो गई है। प्रशासन का तर्क है कि बिना वैध पट्टा (लीज) के संचालित हो रहे मकान और दुकानें अवैध हैं। सालों से इन जमीनों पर अपना अधिकार समझने वाले स्थानीय निवासियों का कहना है कि अचानक उन्हें अपनी ही जमीन पर ‘बाहरी’ और ‘अतिक्रमणकारी’ बना दिया गया है।

​करोड़ों की ‘सलामी’ और भारी लगान का बोझ

प्रशासन ने अवैध कब्जे को वैध करने के लिए जो ‘फ्रेश लीज’ का प्रस्ताव दिया है, उसकी शर्तें रक्सौल के मध्यम वर्गीय व्यापारियों के लिए असंभव जान पड़ती हैं। व्यावसायिक श्रेणी की जमीन के लिए 26 लाख रुपये प्रति डिसमिल की दर से ‘सलामी’ माँगी गई है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बैंक रोड के शिवजी प्रसाद को मात्र 2.58 डिसमिल जमीन के लिए 67,08,000 रुपये चुकाने का नोटिस मिला है। इसके अलावा, कुल सलामी राशि का 5% (लगभग 3.35 लाख रुपये) प्रति वर्ष लगान के तौर पर देना होगा। यह भारी-भरकम वित्तीय बोझ आम आदमी की पहुँच से पूरी तरह बाहर है।

​30 जनवरी तक का अल्टीमेटम: आर-पार की लड़ाई के मूड में जनता

मोतिहारी के प्रभारी उप समाहर्ता द्वारा जारी नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि 30 जनवरी 2026 तक कब्जाधारियों ने अपनी सहमति नहीं दी और राशि जमा नहीं की, तो प्रशासन जमीन को सरकारी कब्जे में लेने के लिए बल प्रयोग और कानूनी कार्रवाई करेगा।
​इस प्रशासनिक सख्ती और तुगलकशाही फरमान ने शहर में बड़े आंदोलन की नींव रख दी है। नगर के प्रमुख नागरिक महेश अग्रवाल, वाल्मीकि मुखिया, सुरेश साह, अरविंद प्रसाद, जगत प्रसाद और अजय शंकर सहित दर्जनों लोगों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रभावितों का कहना है कि वे “मर जाएंगे लेकिन अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।” लोगों ने अब सामूहिक रूप से न्यायालय की शरण लेने और सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है।इधर,जन प्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगों को साल रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected , Contact VorDesk for content and images!!