
रक्सौल।(Vor desk)। भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र के रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। रक्सौल से देश की राजधानी दिल्ली को जोड़ने वाली दो प्रमुख ट्रेनों, सत्याग्रह एक्सप्रेस (15273/74) और सद्भावना एक्सप्रेस (14007/15/17), की यात्रा अवधि को कम करने की दिशा में पूर्व मध्य रेलवे ने ठोस कदम उठाया है। शिक्षाविद डॉ. स्वयंभू शलभ द्वारा भेजे गए एक विस्तृत प्रतिवेदन पर संज्ञान लेते हुए रेलवे प्रशासन ने इन ट्रेनों की गति बढ़ाने और अनावश्यक स्टॉपेज कम करने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है।
सत्याग्रह एक्सप्रेस की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए डॉ. शलभ ने अपने प्रतिवेदन में बताया था कि हाई-स्पीड रेल के आधुनिक दौर में भी यह ट्रेन महज 957 किलोमीटर की दूरी तय करने में 24 घंटे से अधिक का समय लेती है। रक्सौल से सुबह 8:40 बजे प्रस्थान कर यह अगले दिन सुबह 9:10 बजे आनंद विहार पहुंचती है, जो यात्रियों के लिए समय की बर्बादी और असुविधा का कारण है। इसी प्रकार सद्भावना एक्सप्रेस को 1226 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब 30 घंटे लग जाते हैं। उत्तर बिहार के अन्य स्टेशनों से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों की तुलना में इन दोनों ट्रेनों की औसत गति काफी धीमी है, जबकि ये ट्रेनें न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि नेपाल से आने वाले पर्यटकों के लिए भी ‘लाइफलाइन’ मानी जाती हैं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मध्य रेलवे ने रेलवे बोर्ड को भेजे पत्र में स्वीकार किया है कि सत्याग्रह एक्सप्रेस के 45 और सद्भावना एक्सप्रेस के 36 स्टॉपेज होने के कारण इनकी गति सीमित है। रेलवे ने बोर्ड से इन ठहरावों की समीक्षा करने और समय सारणी में सुधार कर यात्रा अवधि घटाने पर तकनीकी सलाह मांगी है। सीमा क्षेत्र की इन महत्वपूर्ण ट्रेनों के कायाकल्प की इस पहल से यात्रियों में उत्साह है। उम्मीद जताई जा रही है कि रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलते ही इन ट्रेनों के परिचालन समय में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिससे रक्सौल से दिल्ली का सफर न केवल तेज होगा बल्कि आरामदायक भी बनेगा।
